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चुदाई का एक शानदार बहाना

February 22nd, 2026 - 4:18 PM
in Bhabhi Sex
Reading Time: 1 min read
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मेरे प्यारे दोस्तों, यह मेरी सच्ची जिंदगी की घटना है, जिसे मैंने सालों से अपने दिल में दबाकर रखा था, कभी किसी को बताने की हिम्मत नहीं हुई, लेकिन अब लगता है कि इसे शेयर करने का वक्त आ गया है। यह एक देसी xxx कहानी है, xxx भाभी चुदाई कहानी जो मेरे साथ लखनऊ में घटी, जहां मैं रोहन नाम का 25 साल का लड़का हूं, और मेरे घर के सभी लोग कुछ दिनों के लिए गांव चले गए थे। मेरे सामने वाले अपार्टमेंट में नए किरायेदार आए थे, सिर्फ पति-पत्नी। पति विजय भैया काम की वजह से ज्यादातर बाहर रहते थे, शहर की भागदौड़ में व्यस्त। मैं अकेला घर पर, और नेहा भाभी भी ज्यादातर अकेली। हमारी बातचीत शुरू हो गई थी, कभी पानी की बोतल मांगने, कभी पड़ोसी वाली छोटी-मोटी मदद। फिर एक दिन भाभी ने पूछा, ‘आजकल खाना कैसे बनाते हो?’ मैंने कहा, ‘होटल से मंगवा लेता हूं या बाहर से खा लेता हूं।’ वो हंसकर बोलीं, ‘बाहर का खाना इतना पसंद आ रहा है? सेहत का क्या?’ मैंने मजाक में कहा, ‘क्या करूं, घर में कोई बनाने वाली नहीं है।’ भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘ठीक है, आज रात मैं रोटियां और सब्जी भेज दूंगी।’ मैंने तुरंत कहा, ‘नहीं भाभी, अगर इतनी ही मेहरबानी है तो घर आकर रोटियां बना दो, सब्जी तो मैं बना लूंगा, कच्ची-पक्की जैसी भी बने।’ भाभी ने हंसकर सहमति जता दी, ‘अच्छा ठीक है, मैं आ जाऊंगी।’ मैं मन ही मन खुश हो गया, सोचा इसी बहाने भाभी के करीब रहने का मौका मिलेगा, उनकी खुशबू, उनकी हंसी, सब कुछ करीब से महसूस कर पाऊंगा। लेकिन मैंने सब्जी बाहर से मंगवा ली थी, ताकि ज्यादा समय साथ बिता सकूं। भाभी 28 साल की थीं, गोरी-चिट्टी, लंबे बाल, कर्वी फिगर, देखकर किसी का भी मन डोल जाए।

रात के 9 बजे भाभी अपना काम निपटाकर मेरे लिए चपाती बनाने आ गईं। मैंने उन्हें आटा दे दिया और अंदर के कमरे में जाकर टीवी ऑन कर लिया। लेकिन मेरा सारा ध्यान भाभी पर ही था, किचन से आती आवाजें, उनकी साड़ी की सरसराहट, सब कुछ मुझे बेचैन कर रही थी। मन कर रहा था कि भाभी खुद बुलाएं और मैं उनके साथ कुछ करूं, लेकिन डर भी लग रहा था, कहीं गलत न समझ लें। मैंने कुछ देर इधर-उधर चैनल बदलते हुए फैशन टीवी लगा दिया, जहां उस वक्त मिडनाइट शो चल रहा था, हॉट मॉडल्स की परेड, कम कपड़ों में। मैं अंजान बनकर देखने लगा, सोच रहा था कि काश भाभी ये देख लें और कुछ रिएक्ट करें। मैं चोरी-चोरी भाभी की तरफ देख रहा था, वो किचन में रोटियां बेल रही थीं, कभी-कभी नजर उठातीं। थोड़ी देर बाद भाभी ने हाथ में रोटी लेकर किचन से झांका, उनकी नजर टीवी पर पड़ी, वो रुक गईं, कभी टीवी देखतीं, कभी मुझे, उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, शायद उत्सुकता या कुछ और। मैंने अनजान बनकर बैठे रहना जारी रखा, दिल की धड़कन तेज हो गई थी।

जब भाभी वापस किचन में गईं, तो मैंने टीवी ऑन ही छोड़ दिया और किचन में चला गया। मैंने कहा, ‘भाभी, मुझे भी रोटियां बनाना सिखा दो ना।’ और उनके बिल्कुल पास जाकर खड़ा हो गया। मेरी आंखें उनकी मस्त चुचियों पर टिक गईं, वो साड़ी के ब्लाउज में से उभरी हुईं, हिल रही थीं रोटी बेलते हुए। मैंने कहा, ‘अरे भाभी, आपको तो पसीना आ रहा है,’ मेरी नजर उनकी चुचियों की दरार पर थी, जहां पसीने की बूंदें चमक रही थीं। भाभी ने झट से अपनी चुन्नी ठीक की और मुस्कुराकर बोलीं, ‘शैतान कहीं का, नजर कहां है तेरी?’ इस पर मेरी हिम्मत बढ़ गई, लगा कि भाभी को बुरा नहीं लगा, बल्कि मजा आ रहा है। मैं और करीब हो गया, उनकी खुशबू मुझे पागल कर रही थी।

मैंने थोड़ा और पास जाकर कहा, ‘भाभी, रोटी बनाना सिखाओ ना,’ और उनके हाथ को छेड़ने लगा। छेड़छाड़ में मेरा हाथ उनकी चुचियों पर लग गया, मैंने झट से हाथ पीछे खींच लिया, लेकिन भाभी कुछ नहीं बोलीं, बस मुस्कुराईं। इससे मेरा लंड खड़ा होने लगा, पैंट में तनाव महसूस हो रहा था। मैं उनके हाथ से खेलता हुआ और करीब आ गया, इतना कि मेरा लंड उनकी मस्त गांड को छूने लगा। भाभी अभी भी चुप थीं, कोई विरोध नहीं, इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैंने कहा, ‘भाभी, तुम तो बहुत सुंदर हो, विजय भैया तुम्हें बहुत खुश रखते होंगे ना?’ भाभी बोलीं, ‘अच्छा, तुझे सुंदर लगती हूं? कहां से?’ मैंने कहा, ‘कहां-कहां से कहूं, तुम हर जगह से परफेक्ट हो।’ भाभी ने कहा, ‘मुझे तेरी चाल ठीक नहीं लग रही, मैं तो घर जा रही हूं।’ मैंने कहा, ‘अरे भाभी, नाराज मत हो, मैं तो मजाक कर रहा था।’ लेकिन मेरा लंड अभी भी उनकी गांड को टच कर रहा था, रॉड की तरह सख्त हो चुका था, और मुझे लग रहा था कि भाभी को भी महसूस हो रहा है, लेकिन वो विरोध नहीं कर रही थीं।

फिर भाभी चुपचाप रोटी बनाने लगीं, और मैं उनकी गांड, कमर, चुचियां, गोरे गाल सब कुछ घूरता रहा। धीरे-धीरे मेरा लंड और मोटा होता जा रहा था, पैंट फाड़ने को तैयार। मैंने धीरे से उनके गाल छुए और कहा, ‘भाभी, तुम्हारे गाल कितने सुंदर हैं।’ भाभी बोलीं, ‘अच्छा?’ कुछ विरोध नहीं, तो मैंने उनकी कमर पर हाथ रख दिया, ‘भाभी, तुम्हारी कमर कितनी चिकनी और पतली है।’ उनके मुंह से सिसकारी निकली, ‘स्स्स…’ और मैं समझ गया कि अब खेल बन सकता है। मैं उनके पीछे आ गया, कमर पकड़ी और लंड उनकी गांड के बीच में सटा दिया। लंड सटते ही हम दोनों के मुंह से ‘ओह्ह…’ निकला, और भाभी ने रोटी छोड़कर आगे से मेरी गांड पकड़ ली, जैसे मुझे और करीब खींच रही हों। मैंने भी उन्हें टाइट पकड़ लिया, उनकी कमर की गर्मी महसूस कर रहा था।

मैंने उनकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया, भाभी मदहोश हो रही थीं, सांसें तेज, और मेरा लंड तो बुरा हाल था। किचन में हमारी सिसकारियां गूंज रही थीं, ‘ओह्ह… अम्म्म… हाह… हाहा…’ भाभी बोलीं, ‘अगर कोई आ गया तो?’ मैंने कहा, ‘कोई नहीं आता, चुप रहो, और पास आओ।’ फिर मैंने उनकी कमीज़ के ऊपर से चुचियां दबानी शुरू कीं, उन्हें रूम में ले गया, बेड पर पटक दिया। मैंने उनके होंठों पर किस ली, कम से कम 5 मिनट तक, जीभ अंदर डालकर चूसता रहा, और चुचियां दबाता रहा। भाभी बोलीं, ‘ओह्ह… अब मजा आ रहा है, और करो… नीचे भी किस करो।’ उनकी चुत गीली हो चुकी थी, मैं महसूस कर सकता था। मैंने उनकी सलवार के ऊपर से उंगली डाली, गर्मी और गीलापन महसूस हुआ, भाभी जोर से सिसकारियां ले रही थीं, ‘हाह… आओ… आह्ह… जोर से…’ मैंने धीरे-धीरे नीचे आकर उनकी चुत पर मुंह रख दिया, सलवार के ऊपर से ही चाटने लगा, भाभी चिल्लाईं, ‘आह्ह… ओओ… चाटो जोर से… हाहा…’ उनकी गांड इधर-उधर हिल रही थी, मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

फिर मैंने अपनी पैंट खोली, लंड बाहर निकाला, 7 इंच का मोटा, तना हुआ 90 डिग्री पर। मैंने भाभी के हाथ में थमा दिया, उन्होंने पकड़कर मुंह में डाल लिया, अंदर-बाहर करने लगीं। ‘आह्ह… भाभी…’ मैंने धक्के मारने शुरू किए, अचानक मेरे लंड से पानी निकला, भाभी ने सारा पी लिया। फिर भी चूसती रहीं, जब तक दोबारा खड़ा नहीं हो गया। इस बीच मैंने पैर की उंगली से उनकी चुत रगड़ी, उनका भी रस निकल गया। भाभी मुंह में लंड लेकर ‘म्म्म… आस… प्प्प… हुं…’ की आवाजें निकाल रही थीं, मैं बोला, ‘आह्ह भाभी, तुम कितनी अच्छी हो… ओफ्फ…’ लंड दोबारा खड़ा हो गया, मैंने भाभी की चुत में उंगली डाली, वो चिल्लाईं, ‘आह्ह… अब लंड डालो, इंतजार नहीं होता… उम्मा…’ मैंने उंगली घुमाई, भाभी मेरे लंड को जोर से हिलाने लगीं।

भाभी की चुत फूली हुई थी, जैसे पुड़ी। मैंने कहा, ‘लंड मुंह में लो,’ लेकिन भाभी ने मना कर दिया, ‘नहीं, अब रहा नहीं जाता, जल्दी चोद दे… मेरी चुत में आग लगी है…’ वो हांफ रही थीं, जैसे दौड़कर आई हों, ‘हह… म्म… ओह… आआ… डालो अंदर…’ मैंने उन्हें लिटाया, गांड के नीचे तकिया रखा, पैर फैलाए। लंड चुत पर रखा, सिर्फ टोपा गया तो भाभी चिल्लाईं, ‘नहीं… छोड़ दो… मर जाऊंगी… निकालो…’ लेकिन मैंने धक्का मारा, जोर का। भाभी और चिल्लाईं, मैंने होंठों पर किस करके मुंह बंद किया, धक्के लगाता रहा। भाभी छटपटा रही थीं, बदन इधर-उधर, लेकिन मैं नहीं रुका, धक्के पर धक्का। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर, भाभी की आंखों से आंसू निकले।

कुछ देर मैं ऊपर लेटा रहा, फिर भाभी शांत हुईं, गालियां देने लगीं, ‘साले, क्या किया… निकालो… नहीं चुदवाना…’ मैंने चुचियां दबाईं, बाल सहलाए, कान चूमे। थोड़ी देर में भाभी फिर गर्म हो गईं। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, पहले चिल्लाईं, फिर कहा, ‘हां… मजा आ रहा है…’ स्पीड बढ़ाई, भाभी मस्ती में, ‘हां… म्म्म… आइई… करो… बहुत मजा…’ वो ठीक से बोल भी नहीं पा रही थीं। मैं स्पीड बढ़ाता गया, ‘हां राजा… आई… सी… आआ… और जोर से चोदो… फाड़ दो चुत को… आज फाड़े बगैर मत छोड़ना… आआाः… उउइइ… म्मा… अह…’ लंड गीला हो रहा था, भाभी रस छोड़ने वाली थीं, कमर उठाकर चिल्ला रही थीं, ‘हा… और चोदो… चुत मत छोड़ना… भोसड़ा बना दो…’ फिर बोलीं, ‘झड़ने वाली हूं…’ मैं भी करीब था, 15-20 मिनट हो चुके थे, ‘हां भाभी, मैं भी…’ गांड पकड़ी, स्पीड बढ़ाई।

भाभी झड़ गईं, मैं भी कुछ देर में झड़ गया। भाभी ने मुझे कसकर बाहों में जकड़ लिया, हम दोनों हांफते हुए लेटे रहे, पसीने से तर, खुशी से भरे। मैंने भाभी के माथे पर किस किया, वो मुस्कुराईं, ‘तुमने तो आज मुझे स्वर्ग दिखा दिया।’ हमने फिर से किस किया, इस बार ज्यादा पैशन से। थोड़ी देर बाद भाभी उठीं, कपड़े ठीक किए, लेकिन मैंने उन्हें रोक लिया, ‘भाभी, एक बार और?’ वो हंसकर बोलीं, ‘शैतान, आज बस, लेकिन कल फिर आऊंगी।’ हमने फिर से शुरू किया, इस बार डॉगी स्टाइल में, मैंने उनकी गांड पकड़ी, लंड डाला, भाभी की सिसकारियां फिर गूंजीं। हमने पूरी रात में तीन राउंड किए, हर बार ज्यादा इंटेंस। सुबह भाभी चली गईं, लेकिन हमारा ये सिलसिला जारी रहा, जब तक परिवार वापस नहीं आया।

यह सब कुछ इतना अनोखा था कि मैं कभी भूल नहीं सकता, भाभी की वो रातें, वो पल।

यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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