मेरा नाम राहुल है। मैं जयपुर, राजस्थान से हूं। यह मेरी जिंदगी की वो सच्ची घटना है जिसे मैं सालों से अपने दिल में दबाए रखा था, कभी किसी से शेयर नहीं किया क्योंकि इसमें इतनी गर्मी और रोमांच था कि सोचकर ही सिहरन हो जाती है। यह एक देसी xxx कहानी है जो मेरे साथ सच में घटी। एक दिन मैं कॉलेज से घर लौट रहा था, बस काफी भरी हुई थी लेकिन मैं दो सीट वाली तरफ बैठा था। मेरे बगल की सीट खाली थी, तभी एक खूबसूरत औरत आई और मेरे पास बैठ गई। वो करीब 30 साल की लग रही थी, गोरी चिट्टी, टाइट साड़ी में उसके कर्व्स साफ दिख रहे थे। रास्ते में वो बार-बार अपने पैर से मेरे पैर को छू रही थी, कभी जानबूझकर तो कभी जैसे अनजाने में। उसकी ये हरकतें देखकर मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा, मैं खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था लेकिन मन में ख्याल आने लगे कि काश ये और आगे बढ़े।
मैंने सोचा कि शायद ये संकेत है, इसलिए मैंने अपना फोन निकाला और स्क्रीन पर अपना नंबर टाइप करके रख दिया ताकि वो देख सके। उसने एक नजर मेरी स्क्रीन पर डाली और मुस्कुराई, फिर उसने अपना फोन निकाला और अपना नंबर लिख लिया। मैंने तुरंत उस नंबर पर डायल किया, रिंग गई लेकिन मैंने काट दिया। वो मेरी तरफ देखकर हल्के से मुस्कुराई, मैंने भी स्माइल दी। अब मेरा लंड पूरी तरह तन गया था, पैंट में उभार साफ महसूस हो रहा था। मैंने महसूस किया कि वो भी उत्तेजित है, उसकी सांसें तेज चल रही थीं।
मैंने धीरे से अपना पैर उसकी तरफ बढ़ाया और उसके पैर पर रख दिया, वो नहीं हटी बल्कि और करीब आई। थोड़ी देर बाद मेरा स्टॉप आ गया, मैं उतरा तो देखा वो भी मेरे पीछे उतर गई। मैं घर पहुंचा लेकिन मन उसी औरत के बारे में सोच रहा था, उसकी आंखों में वो प्यास, वो छुअन। रात को मैंने हिम्मत करके उसका नंबर डायल किया।
उसने फोन उठाया और हेलो बोला, मैंने कहा कि मैं वो हूं जो बस में तुम्हारे बगल में बैठा था। वो हंसी और बोली कि हां, मैं तुम्हारी ही कॉल का इंतजार कर रही थी। मैंने पूछा कि कहां से हो, उसने कहा कि मैं जयपुर में ही रहती हूं। फिर उसने खुद बताया कि वो शादीशुदा है, पति जॉब के सिलसिले में ज्यादातर बाहर रहते हैं, घर पर अकेली रहती हूं। उसकी आवाज में एक उदासी थी लेकिन साथ ही एक चाहत।
फिर उसने सीधे कह दिया कि मुझे लंड की बहुत प्यास है, क्या तुम बुझा सकते हो? कल मेरे घर आ जाओ। मैं हैरान रह गया, लेकिन खुश भी। मैंने हां कह दिया।
मैं सोच भी नहीं सकता था कि वो इतनी जल्दी राजी हो जाएगी। पूरी रात मैं उसके बारे में सोचता रहा, मेरा लंड बार-बार खड़ा हो जाता, मैंने कई बार मुठ मारी लेकिन संतुष्टि नहीं मिली। उसके बदन की कल्पना, उसकी चुत की गर्मी, सब कुछ दिमाग में घूम रहा था।
अगले दिन मैं जल्दी उठा, कॉलेज नहीं गया। आप समझ ही सकते हैं कि मैं कहां जा रहा था। मैंने अच्छे से तैयार होकर, परफ्यूम लगाकर निकला, मन में घबराहट और उत्तेजना दोनों थीं।
उसके बताए एड्रेस पर पहुंचा, एक अच्छा सा अपार्टमेंट था। मैंने डोरबेल बजाई, दरवाजा खुला तो मैं चौंक गया। वो औरत नहीं थी जो बस में मिली थी, बल्कि कोई और थी, और भी खूबसूरत, नीली साड़ी में। उसने पूछा कि आप कौन, मैंने कहा राहुल हूं। वो बोली अरे तुम राहुल हो, अंदर आओ। मैं कन्फ्यूज था कि ये कौन है।
तभी पीछे से वो बस वाली औरत आई, मुस्कुराई और बोली कि डरो मत राहुल, अंदर आओ। ये मेरी सहेली नेहा है, और नेहा ये राहुल है, कल बस में मिला था। जो बस में मिली थी उसका नाम प्रिया था। नेहा ने भी स्माइल दी, मैं अंदर गया।
हम बैठे, प्रिया ने नेहा को पानी लाने भेजा। नेहा गई तो प्रिया ने बताया कि नेहा मेरी बेस्ट फ्रेंड है, इसका पति भी बाहर रहता है, इसे भी लंड की जरूरत है। मैंने इसे सब बता दिया है, वो भी हमारे साथ सेक्स करेगी। मैं मन ही मन झूम उठा, दो-दो चुत एक साथ!
मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा होगा। मैं ग्रुप सेक्स के बारे में सिर्फ कहानियां पढ़ता था, लेकिन अब रियल में। तभी नेहा पानी लेकर आई, गिलास देते वक्त उसने मेरे हाथ को छुआ, सेक्सी स्माइल दी। मैंने पानी पिया, मन में तूफान था।
प्रिया बोली कि तुम दोनों बात करो, मैं आती हूं। नेहा मेरे बगल में बैठ गई, वो लाल साड़ी में थी, उसके बड़े-बड़े बूब्स, मस्त गांड, मैं पागल हो रहा था। नेहा ने धीरे से हाथ मेरे लंड पर रखा, दूसरा हाथ मेरे कंधे पर। मैंने उसके बूब्स दबाए, उसके होंठों पर अपने होंठ रखे, वो चूसने लगी।
मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाली, वो जोर से चूसने लगी जैसे लंड चूस रही हो। फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली, गर्मागर्म। मेरी उत्तेजना दोगुनी हो गई। मैंने हाथ उसकी चुत पर रखा, चिकनी, झांटें साफ।
नेहा की चुत की झांटें कटी हुई थीं। उसने मेरी पैंट की चेन खोली, लंड निकाला, हिलाने लगी। मैं उसकी चुत और बूब्स मसल रहा था। फिर मैंने उसके कपड़े उतारे, वो नंगी हो गई। मैंने उसके पूरे बदन को चूमा, चाटा। उसने मेरे कपड़े उतारे, हम नंगे लिपटे थे।
तभी आवाज आई, वाह क्या सीन है। प्रिया नंगी खड़ी थी, उसका बदन और भी सेक्सी। वो हमारे पास आई, अब कमरा चुदाई के माहौल से भर गया, दो चुत एक लंड।
प्रिया बोली चलो बेडरूम में। हम गए, मैंने नेहा को लिटाया, उसकी चुत चाटी, पानी पिया, स्वादिष्ट। प्रिया ने मेरा 9 इंच का लंड मुंह में लिया, चूसने लगी। नेहा अपने बूब्स दबा रही थी, नेहा की उंगली प्रिया की चुत में।
मैंने एक हाथ से प्रिया के बूब्स मसले। थोड़ी देर बाद मैं प्रिया की चुत चाटने लगा, नेहा मेरा लंड चूस रही थी। फिर मैंने दोनों के होंठ चूसे, दोनों की चुत लंड के लिए तड़प रही थीं।
मैंने दोनों को साथ बिठाया, लंड बीच में, दोनों चूसने लगीं। अह अह की आवाजें। मेरा पानी निकला, दोनों के मुंह पर, वो पी गईं।
प्रिया ने लंड साफ किया। अब नेहा लंड चूसने लगी, प्रिया नेहा की चुत चाटने लगी, मैं प्रिया के निप्पल चूसने लगा। प्रिया अह अह कर रही थी। प्रिया ने नेहा की चुत में हाथ डाला, नेहा उछलने लगी। नेहा ने मेरा लंड जोर से चूसा, लंड फिर खड़ा।
नेहा की चुत बेकाबू, वो मेरे लंड पर बैठ गई। मैंने सेट किया, धक्का मारा, पूरा लंड अंदर। नेहा चीखी, मर गई। मैंने धक्के मारे, वो साथ देने लगी। प्रिया मेरे मुंह पर चुत रखी, मैं चूस रहा था। थोड़ी देर बाद नेहा से लंड निकाला, प्रिया को घोड़ी बनाया, पीछे से चुत में डाला। प्रिया गांड हिलाने लगी। नेहा प्रिया के आगे घोड़ी, प्रिया नेहा की चुत चाटती, उंगली डालती। नेहा चीखी, प्रिया ने गांड में उंगली डाली। मेरा लंड गांड मांगने लगा।
मैंने प्रिया की गांड पर थूक लगाया, लंड सेट किया। प्रिया डरी, नेहा हंसी, बोली अभी तू मेरी गांड में उंगली डाल रही थी, अब राहुल लंड से तेरी। प्रिया बोली मर जाऊंगी। मैंने कहा डरो मत, धीरे से। धक्का मारा, आधा अंदर, दूसरा धक्का पूरा। प्रिया चिल्लाई, निकालो। मैंने धीरे धक्के मारे।
प्रिया का दर्द देख नेहा ने उसके बूब्स मसलने शुरू किए, निप्पल चूसे। प्रिया अब मजा लेने लगी, गांड हिलाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई, ठप ठप की आवाजें। नेहा अपनी चुत रगड़ रही थी। फिर मैंने नेहा की गांड भी मारी, दोनों को बारी-बारी चोदा। कई राउंड चले, सब थक गए लेकिन संतुष्ट। अब हम अक्सर मिलते हैं।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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