यह मेरी वो सच्ची कहानी है जो मैंने हमेशा अपने दिल में दबाकर रखी थी, कभी किसी से शेयर करने की हिम्मत नहीं हुई, एक xxx भाभी चुदाई कहानी जो देसी हिंदी सेक्स कहानी की तरह लगती है लेकिन मेरी जिंदगी का हकीकत हिस्सा है। मेरा नाम राहुल है, उम्र 22 साल, मैं दिल्ली में रहता हूं। तीन महीने पहले की बात है, क्रिसमस की छुट्टियां थीं और मेरे दोस्त अजय के घरवाले मुझे उनके गाँव ले गए। मुझे गाँव की जिंदगी पसंद है, हरी-भरी खेतें, शांत वातावरण, सब कुछ शहर से अलग। हम रात की ट्रेन से निकले और अगले दिन दोपहर तक उनके छोटे से गाँव पहुंच गए, जो उत्तर प्रदेश के एक कोने में बसा है। हम सिर्फ तीन लोग थे – मैं, अजय की मां और पापा। गाँव के घर में अजय का चचेरा भाई और उसकी पत्नी रहते थे। भाभी की उम्र करीब 35-38 साल होगी, लेकिन क्या कमाल का फिगर था उनका – 40-39-42, बड़े-बड़े स्तन जो देखते ही मन ललचा जाता। मुझे तो लग रहा था कि अभी जाकर उन्हें दबा दूं, चूस लूं सारा रस। भाभी बहुत फ्रैंक थीं, बातचीत में खुली हुईं, हंसती-मुस्कुरातीं।
पहले ही दिन से मेरी उनसे अच्छी बन गई। मैं उनके साथ खेतों में काम करने जाने लगा, मदद करता, बातें करता। गाँव की सुबहें ठंडी होतीं, धुंध छाई रहती, लेकिन भाभी के साथ समय कटता तो पता ही नहीं चलता। एक दिन हम दोनों अकेले खेत पर थे, भाभी काम में इतनी मगन थीं कि उनकी साड़ी का पल्लू गिर गया और ब्लाउज से उनके स्तन बाहर आने को बेताब लग रहे थे। मैं तो बस उन्हें घूरता रहा, मेरा ध्यान कहीं और नहीं था। थोड़ी देर बाद भाभी ने मेरी नजर पकड़ ली, लेकिन कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराईं और काम जारी रखा। मुझे लगा शायद उन्हें बुरा नहीं लगा, बल्कि मजा आ रहा है।
दोपहर का खाना हम खेत पर ही खा रहे थे, बैठकर। भाभी ने जानबूझकर अपना पल्लू फिर गिराया, उनके स्तन साफ दिख रहे थे। मेरा लंड खड़ा होने लगा, हाफ पैंट में तंबू बन गया। भाभी चोरी-चोरी देख रही थीं, उनकी आंखों में शरारत थी। खाना खत्म होने के बाद भाभी बोलीं, ‘राहुल, मेरी कमर में थोड़ा दर्द है, जरा दबा दोगे?’ मैंने हां कह दी, उत्सुक था। भाभी लेट गईं, मैं उनके पास बैठकर कमर दबाने लगा। उनकी पीठ आधी नंगी थी, गर्म त्वचा छूते ही电流 सा दौड़ा।
मैंने हिम्मत करके उनके ऊपर बैठ गया, कमर दबाते हुए। इससे मेरा लंड उनकी गांड से रगड़ खाने लगा, मजा आने लगा। भाभी की आंखें बंद थीं, होंठ दांतों तले दबे, वो भी एंजॉय कर रही थीं। धीरे-धीरे मैंने हाथ ऊपर सरकाया, पीठ दबाते हुए स्तनों को छूने लगा। भाभी गर्म हो गईं, सांसें तेज। मैंने हिम्मत की और उनके स्तनों को जोर से दबाया। भाभी की सिसकारी निकली, ‘आह… आराम से दबाओ ना।’ मैं समझ गया, वो तैयार हैं।
मैंने उन्हें सीधा किया, होंठों पर吻 किया। पहले तो भाभी को吻 नहीं आया, लेकिन फिर साथ देने लगीं। मैंने ब्लाउज उतारा, उनके बड़े-बड़े स्तन आजाद हो गए। मैं पागलों की तरह देखता रहा, भाभी बोलीं, ‘सिर्फ देखोगे या रस भी पियोगे?’ मैंने एक स्तन मुंह में लिया, चूसने लगा, दूसरे को दबाया। स्वाद कमाल का, भाभी तड़प रही थीं, ‘आह… जोर से चूसो राजा, मजा आ रहा है।’ मैंने 10 मिनट तक चूसा, बीच में साड़ी उतार दी, अब वो पेटीकोट में थीं।
उनकी चुत पेटीकोट के ऊपर से सहलाई, गीली हो चुकी थी। मैंने उन्हें पूरी नंगी किया, खड़ा किया। चुत पर吻 की, दाने को दांतों से काटा, उंगली डाली। भाभी चिल्लाई, ‘आह… क्या कर रहे हो, पागल कर दोगे।’ वो झड़ गईं, रस निकला। भाभी बोलीं, ‘इतना मजा तो शादी की पहली रात भी नहीं आया।’
फिर उन्होंने मुझे नंगा किया, लंड सहलाया। मैंने फिर उन्हें गर्म किया, चुत सहलाई, स्तन चूसे। लंड चूसने को कहा, मना कर दिया। मैंने लंड चुत पर रगड़ा, भाभी बोलीं, ‘डाल दो अब।’ मैंने धक्का मारा, आधा लंड अंदर। भाभी चीखी, ‘आह… क्या धक्का है।’ दूसरा धक्का, पूरा लंड अंदर। जोर-जोर से चोदने लगा।
7 मिनट बाद भाभी बोलीं, ‘जोर से मारो राजा, खुजली मिटा दो।’ वो झड़ गईं, लेकिन मैं नहीं। उन्हें घोड़ी बनाया, गांड में लंड डाला। भाभी चीखी, ‘आराम से, फाड़ दोगे।’ मैं जोर से चोदता रहा, फिर गांड में झड़ा। हम हांफते रहे, भाभी बोलीं, ‘आज जैसा मजा कभी नहीं मिला।’
फिर कपड़े पहने, घर आए। उसके बाद तीन बार और चोदा। लेकिन वो तो शुरुआत थी। अगले दिन सुबह मैं फिर खेत गया, भाभी पहले से वहां थीं। आज मौसम सुहाना था, हल्की बारिश की बूंदें गिर रही थीं। भाभी ने मुझे देखते ही मुस्कुराया, ‘आ गए राजा? आज फिर दर्द है कमर में।’ मैं समझ गया, खेल शुरू। हम एक झोपड़ी में गए, जहां कोई नहीं आता। भाभी ने साड़ी उतारी, नंगी हो गईं। मैंने उनके पूरे शरीर को चूमा, गर्दन से पैर तक। भाभी कराह रही थीं, ‘आह… तुम्हारी जीभ जादू करती है।’
मैंने चुत चाटी लंबे समय तक, दो उंगलियां डालीं, भाभी तड़पती रहीं। फिर उन्होंने मेरा लंड मुंह में लिया, पहली बार। चूसने लगीं, ‘उम्म… कितना मोटा है।’ मैंने उनके मुंह में धक्के मारे। फिर चुत में लंड डाला, अलग-अलग पोजिशन में चोदा – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल। भाभी चिल्लाती रहीं, ‘चोदो मुझे जोर से, मैं तुम्हारी रंडी हूं।’ हम दोनों कई बार झड़े।
दूसरी बार शाम को, घर में सब सो रहे थे। भाभी रसोई में थीं, मैं चुपके गया। उन्हें दीवार से सटाया, पीछे से लंड रगड़ा। भाभी फुसफुसाई, ‘कोई आ जाएगा।’ लेकिन रुक नहीं सकीं। मैंने पेटीकोट ऊपर किया, गांड में डाला। जोर-जोर से चोदा, मुंह दबाकर। मजा दोगुना था खतरे से।
तीसरी बार रात को, छत पर। चांदनी रात थी, ठंडी हवा। भाभी ऊपर आईं, हम नंगे होकर लेटे। लंबी फोरप्ले, 69 पोजिशन में एक-दूसरे को चाटा। फिर घंटों चुदाई, अलग-अलग तरीके से। भाभी कहती रहीं, ‘तुमने मेरी जिंदगी बदल दी।’
गाँव में वो दिन यादगार थे। भाभी के साथ हर पल कामुक, रोमांचक। मैंने सीखा कि देसी भाभियां कितनी गर्म हो सकती हैं। अब शहर वापस आ गया, लेकिन यादें ताजा हैं। कभी-कभी फोन पर बात होती, वो कहतीं, ‘कब आओगे फिर?’
यह कहानी लिखते हुए दिल धड़क रहा है, इतनी विस्तार से शेयर की। लेकिन लगा कि छिपाना ठीक नहीं।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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