हैलो दोस्तों, ये मेरी वो देसी xxx कहानी है जो मैं सालों से दिल में दबाए रखा था, कभी किसी को बताने की हिम्मत न हुई क्योंकि ये xxx बहन की चुदाई कहानी है जो मेरी जिंदगी का सबसे गुप्त राज है। मैं अर्जुन हूं, लखनऊ के एक साधारण परिवार से, जहां मां-पापा के अलावा सिर्फ मेरी बड़ी बहन प्रिया दीदी थीं। दीदी 19 साल की थीं, मैं उस वक्त 17 का, घर का सबसे छोटा होने से सबका लाड़ला था। दीदी का प्यार तो जैसे समंदर सा था, हर छोटी-मोटी बात पर मुझे गले लगा लेतीं, किस कर लेतीं, और बदले में मैं भी उन्हें किस देता। अब सोचता हूं तो लगता है वो प्यार शायद शुरू से ही कुछ और था, लेकिन तब नादान थे हम। आज भी वो यादें ताजा हैं, और हां, हम आज भी चुपके-चुपके मिलते हैं, वो चुदाई का मजा कभी कम नहीं हुआ। अभी हाल ही में जब हम होटल में मिले, तो दीदी ने मेरा लंड मुंह में लेकर ऐसे चूसा जैसे कोई भूखी हो, फिर मैंने उनकी चूत को 15 मिनट तक चोदा, उनकी टाइट चूत में लंड घुसाते ही वो चीख उठीं। शादी के बाद भी उनकी चूत वैसी ही सख्त है, जैसे पहली बार हो। चुदाई के बाद दीदी ने हंसकर कहा, \”भाई, याद है वो बारिश वाला दिन जब तेरे लंड पर चोट लगी थी?\” वो बात सुनते ही सब याद आ गया।
उस दिन हम दोनों स्कूल से लौट रहे थे। दीदी की स्कूटी पर मैं पीछे बैठा, वो चलातीं। लखनऊ की सड़कें उस वक्त सूनी-सी लग रही थीं, मानो बारिश ने सबको घर बांध लिया हो। स्कूल के बाद हम साथ ही जाते थे, दीदी को मेरी देखभाल का जिम्मा था। अचानक आसमान फट पड़ा, बूंदें स्कूटी पर चपचप मारने लगीं। मैंने कहा, \”दीदी, रुक जाओ ना, बारिश रुकने दो।\” लेकिन वो हंसकर बोलीं, \”नहीं भाई, भीगते हुए चलेंगे, मजा आएगा।\” बारिश तेज हो गई, सड़क पर सिर्फ हमारी स्कूटी की आवाज गूंज रही थी। कारें आ-जातीं, लेकिन बाइक वाला कोई नहीं। डर से मेरा दिल धक-धक कर रहा था।
दीदी ने कहा, \”कसकर पकड़ ले भाई, गिर मत जाना।\” मैंने उनके पेट पर हाथ लपेट दिए, पूरी तरह चिपक गया। उनकी साड़ी भीगकर शरीर से सट गई थी, गर्माहट महसूस हो रही थी। वो बोलीं, \”ऐसे धीरे क्यों पकड़े हो? ऊपर से टाइट पकड़ो।\” मैंने हाथ ऊपर किया, तो उनके बूब्स को छू लिया। वो बड़े, गोल, मुलायम थे। दीदी ने कुछ नहीं कहा, बस स्कूटी को दाएं-बाएं झुकाकर चलाती रहीं। डर के मारे मैं और जोर से पकड़ लिया।
जब स्कूटी दाएं झुकती, तो बायां बूब दब जाता, बाएं झुकती तो दायां। मेरे हाथों में वो कांप रहे थे। तभी पेशाब लग गया। मेरा लंड टाइट हो गया, पैंट में दर्द होने लगा। घर में सब इसे ‘मुन्ना’ कहते थे, लेकिन दोस्तों ने बताया था कि ये लंड है। मैंने चिल्लाया, \”दीदी, पेशाब लग गया, रोक दो!\” लेकिन वो नहीं रुकीं।
मैं बर्दाश्त करता रहा, फिर जोर-जोर से चिल्लाने लगा। तब तक हम घर के पास पहुंच गए थे। बीच में एक बड़ा सा पार्क था, चारों तरफ खाली। बारिश में वो सुनसान था। मैंने फिर कहा, \”अब तो रोक दो दीदी।\” आखिरकार स्कूटी रुकी। दीदी ने मेरे गाल चूमे और बोलीं, \”जल्दी कर आ, घर जाना है।\” मैं झाड़ियों के पीछे गया, किया और लौटा। बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी।
मैं बोला, \”दीदी, चेन बंद नहीं हो रही।\” वो हंसकर बोलीं, \”जा, मैं बंद कर दूंगी।\” चेन पकड़ी, लेकिन लंड फंस गया। दर्द से मैं चीखा। दीदी घबरा गईं। धीरे से चेन नीचे किया, लंड निकाला। वो लाल हो गया था, सूजा हुआ। दर्द असहनीय था।
दीदी ने अचानक लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगीं। मैं चौंका, \”दीदी, ये क्या?\” वो बोलीं, \”जब उंगली कट जाए तो मुंह में डालते हैं ना? वही कर रही हूं, दर्द कम होगा।\” सच में, थोड़ा आराम मिला। फिर उन्होंने लंड पैंट में डाला, चेन बंद की। मेरी आंखों में आंसू थे। वो बोलीं, \”रो मत, गले लगा ले।\” मुझे सीने से चिपका लिया। मेरा मुंह उनके बूब्स के बीच दब गया। वो इतने नरम थे, गर्म। उन्होंने सिर दबाया। \”ठीक हुआ?\” मैं बोला, \”नहीं दीदी, अभी दर्द है।\”
फिर वो बोलीं, \”कुछ और करूं?\” और होंठ चूम लिया। किस करते हुए लंड फिर टाइट हुआ, दर्द बढ़ गया। मैंने रोका। फिर स्कूटी पर सवार होकर घर लौटे। घर पहुंचे तो बुआ आई हुई थीं। उनकी शादी हो चुकी थी, एक साल का बच्चा था। मैंने प्रणाम किया, उन्होंने गाल चूमा। हंसकर बोलीं, \”अभी भी शैतान है तू।\” मैं बच्चे को गोद में लेने लगा, मां ने डांटा, \”पहले कपड़े बदलो, गीले हो।\”
मैं अपने कमरे गया। दीदी-मेरा कमरा शेयर था। अंदर घुसा तो दीदी साड़ी उतार रही थीं, ब्रा में। वो चिल्लाईं, \”अरे, बाहर देख! दरवाजा बंद कर।\” मैंने बंद किया, बोला, \”तुम्हें पता नहीं था?\” वो कमर पर हाथ रखकर बोलीं, \”शाना मत बन, वरना कान पकड़ लूंगी।\” उनके बूब्स ब्रा से बाहर झांक रहे थे, बड़े-बड़े। मैं घूरता रहा।
वो बोलीं, \”क्या घूर रहा? कपड़े उतार जल्दी।\” मेरे पास आईं, शर्ट उतारी, फिर पैंट। मैं नंगा खड़ा। लंड अभी भी लाल। छुआ तो दर्द हुआ, आह निकली। वो मुझे बेड पर गोद में उठा खड़ी कर दिया। उनका चेहरा लंड के सामने। हाथों में लिया, \”दर्द है अभी?\” \”हां दीदी, हल्का।\” वो रो पड़ीं, \”मेरी गलती से…\” लिपट गईं। उनका गाल लंड से सटा। लंड अकड़ गया, दर्द फिर।
उन्हें महसूस हुआ, बोलीं, \”फिर चूस लूं, ठीक हो जाएगा।\” मुंह में लिया, चूसने लगीं। लगा जैसे लॉलीपॉप। मैं बोला, \”दीदी, ऐसा क्यों चूस रही हो, जैसे लॉलीपॉप।\” वो हंसकर बोलीं, \”यही लड़कियों का लॉलीपॉप है।\” \”लड़कों का क्या?\” वो उठीं, बूब्स दिखाते हुए, \”ये।\” मैं बोला, \”मुझे भी चुसाओ।\” वो हट गईं, टॉप पहनकर बाहर चली गईं। मैं पैंट पहनकर लौटा।
बाहर मां दीदी से बात कर रही थीं। मां ने कहा, \”दिखाओ चेन कहां लगी।\” मैं मना किया, थप्पड़ पड़ा। \”जवान होकर शर्म?\” सब हंसे। मां ने पैंट उतारी, मलहम लगाया। जलन कम हुई। बोलीं, \”डॉक्टर से दवा लाती हूं।\” बुआ बोलीं, \”मैं भी चलूं।\” बच्चा सो रहा था, वो छोड़कर चली गईं। बारिश अभी भी हो रही थी।
मां-बुआ के जाने पर दीदी बोलीं, \”मुझसे शर्माते नहीं, मां से क्यों?\” मैं बोला, \”तुमसे शर्माऊं?\” तकिया फेंका, उनके बूब्स पर लगा। वो चिल्लाईं, \”जानबूझकर!\” मैं मना किया। गुस्से में कमरे में चला गया, पढ़ाई का नाटक करने लगा।
दीदी पीछे आईं, पीठ से गले लग गईं, झुककर होंठ चूमने लगीं। उनका सांस मेरे गले पर लग रहा था। मैं पिघल गया। \”दीदी…\” वो फुसफुसाईं, \”शांत भाई, सब ठीक हो जाएगा।\” उनके हाथ मेरी छाती पर फेरने लगे। कमरे में बारिश की आवाज, बाहर की ठंडक, अंदर गर्मी। मैं मुड़ा, उन्हें चूमा। पहली बार इतना गहरा किस। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेली।
कुछ देर किस करते रहे। फिर दीदी बोलीं, \”तेरा लंड अब ठीक है?\” मैं शरमाया। वो हंसकर पैंट नीचे की, लंड बाहर। अभी भी थोड़ा लाल, लेकिन टाइट। \”देख, कितना मजबूत हो गया।\” मुंह में लिया, चूसने लगीं। इस बार ज्यादा जोर से। गग… गग… की आवाज। मैं सिहर उठा। \”दीदी, ये क्या… मजा आ रहा है।\” वो ऊपर देखकर मुस्कुराईं, चूसती रहीं। लार लंड पर चिकनी हो गई।
मैंने उनके बाल पकड़े, धीरे से दबाया। वो गले तक ले गईं। आंसू आ गए उनके, लेकिन रुकीं नहीं। 5 मिनट चूसीं, फिर बोलीं, \”अब तू मुझे छू।\” मैंने उनकी साड़ी ऊपर की, पैंटी पर हाथ फेरा। गीली थी। \”दीदी, ये…\” \”हां भाई, छू।\” उंगली अंदर डाली, चूत गर्म, गीली। वो सिसकारीं भरने लगीं, \”आह… हां…\” मैंने उंगली अंदर-बाहर की, चपचप की आवाज।
दीदी ने साड़ी उतारी, ब्रा खोली। बूब्स बाहर, गुलाबी निप्पल। मैंने मुंह में लिया, चूसा। वो कराहने लगीं, \”भाई… जोर से… चूस…\” उनके हाथ मेरे लंड पर, सहला रही थीं। हम बेड पर लेट गए। मैं ऊपर, उनके बूब्स चूसता रहा। नीचे उंगली चूत में। वो कसमसाने लगीं, \”भाई… कुछ और…\”
मैं समझ गया। लंड उनकी चूत पर रगड़ा। \”दीदी, डालूं?\” \”हां… धीरे से…\” टोपा अंदर गया। टाइट थी चूत, दर्द हुआ शायद। वो चीखीं, \”आह… धीरे…\” मैं रुका। फिर धीरे धक्का दिया। आधा लंड अंदर। खून निकला थोड़ा। \”दीदी, दर्द?\” \”हां… लेकिन जारी रख…\” मैंने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया। ठप… ठप… चपचप।
धीरे-धीरे स्पीड बढ़ी। दीदी की कमर उठने लगी, \”हां भाई… चोद… जोर से चोद…\” मैंने पूरी ताकत लगाई। लंड पूरी चूत में। चुदाई की आवाज कमरे में। \”आह… ऊंह… भाई… तेरी चुदाई… कमाल…\” मैंने बूब्स दबाए, निप्पल चूसे। वो झड़ने लगीं, चूत सिकुड़ गई, रस बहा। \”आह्ह्ह… आ गया…\”
मैं रुका नहीं। और जोर से चोदा। 10 मिनट बीत गए, फिर 20। दीदी 3 बार झड़ीं। \”भाई… तू चुदक्कड़ है… चोदते रह…\” मैंने पोजीशन बदली, डॉगी में। पीछे से पेला। गांड थपथपाई। \”हां… फाड़ दे…\” लंड चूत में आ-जा रहा था। पसीना बह रहा था हमारा।
अचानक दरवाजे की घंटी बजी। मां-बुआ लौट आईं। हम घबरा गए। जल्दी कपड़े पहने। दीदी बोलीं, \”शशश… चुप।\” बाहर गईं। मैं बेड पर लेटा रहा। दिल धक-धक। लेकिन वो पहली चुदाई थी, जो जिंदगी बदल गई।
उस रात सोते वक्त दीदी पास आईं। फुसफुसाईं, \”भाई, कल फिर?\” मैं मुस्कुराया। उसके बाद हर बारिश में हम पार्क जाते। चुदाई के नए-नए तरीके सीखे। कभी मुंह में झड़ता, कभी चूत में। दीदी चुदवातीं रहीं, कभी ऊपर आकर चोदतीं।
स्कूल के बाद घर आते, कमरे में लॉक कर चुदाई। एक दिन दीदी बोलीं, \”भाई, तेरा लंड इतना मोटा, चूत फाड़ देता है।\” मैं हंसकर बोला, \”तुम्हारी चूत टाइट रखती है।\” हम हंसते, चोदते। भावनाएं गहरी हो गईं। प्यार था, वासना थी।
दीदी की शादी तय हुई। आखिरी रात होटल में मिले। घंटों चुदाई की। \”भाई, शादी के बाद भी आना।\” \”हां दीदी, हमेशा।\” चूत में झड़ा, गले लगे।
आज भी मिलते हैं। वो चुदवाने आतीं, मैं चोदता हूं। ये राज हमारा। लेकिन अब बता रहा हूं, क्योंकि छुपाना बोझ था।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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