हैलो दोस्तों, यह मेरी एक ऐसी हॉट देसी स्टोरी है जिसे मैं हमेशा छुपाना चाहता था लेकिन आज दिल कर रहा है कि आप सबको बताऊं। मेरा नाम राहुल है, उम्र 24 साल, मैं लखनऊ में रहता हूं। दिखने में काफी अच्छा हूं, गोरा-चिट्टा, लंबा कद और मेरा लंड 8 इंच लंबा, मोटा, हमेशा तैयार रहता है। यह मेरी असली कहानी है जो मैंने कभी किसी को नहीं बताई लेकिन अब शेयर कर रहा हूं क्योंकि यह अनुभव मेरी जिंदगी का सबसे गर्म हिस्सा है। xxx भाभी चुदाई कहानी जैसी यह घटना मेरे साथ हुई जब मैं अपने भाई के घर गया था।
मेरे बड़े भाई का नाम अजय है, वो दिल्ली में एक अच्छी कंपनी में जॉब करते हैं। उनकी पत्नी, यानी मेरी भाभी रिया, उम्र 32 साल, बहुत खूबसूरत और सेक्सी हैं। फिगर 36-28-38, गोरी चिट्टा रंग, लंबे बाल, बड़े-बड़े चुचे और गोल मटोल गांड। पिछले तीन साल से मैं उनकी दीवानी था लेकिन कभी कुछ कह नहीं पाया। भाई के घर अक्सर जाता था, भतीजे के साथ खेलता और भाभी को चुपके से घूरता रहता। वो मुझे पकड़ लेतीं तो बस मुस्कुरा देतीं और कहतीं, ‘राहुल, अब शादी कर ले, इतना घूरना बंद कर।’
उन दिनों मेरे पास कोई नौकरी नहीं थी, पैसे की तंगी रहती थी। तो मैं 55 Game खेला करता था। मैंने इस लिंक से ज्वाइन किया था, जॉइन करते ही पहले डिपॉजिट पर 500 रुपये मिले और रोज 100-200 रुपये का गिफ्ट कोड मिल जाता था। जब ये पैसे जमा होकर 500-1000 हो जाते तो निकाल लिया करता था। मैं आज भी ये खेलता हूं, इससे थोड़ी बहुत मदद हो जाती है।
यह सब दिसंबर के आखिरी हफ्ते की बात है। नया साल मनाने मैं भाई के घर दिल्ली पहुंच गया। 24 तारीख को पहुंचा, भतीजा रोहन 10 साल का है, मेरे साथ बहुत घुलमिल जाता है। भाभी भी मुझसे खुलकर बात करती हैं। हम सबने 25 तारीख को क्रिसमस मनाया, घूमे-फिरे, मजे किए। लेकिन 26 तारीख सुबह भाई को अचानक ऑफिस से इमरजेंसी कॉल आया और वो दो दिन के लिए मुंबई चले गए। घर में अब सिर्फ मैं, भाभी और रोहन थे। शाम को भाभी को अचानक बुखार चढ़ आया, ठंड लगने लगी। मैंने मेडिकल स्टोर से पैरासिटामॉल और दूसरी दवाइयां लाकर दीं। पूरा दिन उनका ख्याल रखा, खाना बनवाया, काम नहीं करने दिया।
रात को डिनर के बाद रोहन सो गया। भाभी बेडरूम में लेटी थीं, नाइट गाउन पहने हुए। मैं लिविंग रूम में टीवी देख रहा था। बाहर ठंड बहुत थी। भाभी ने मुझे आवाज दी, ‘राहुल, जरा इधर आना।’ मैं गया तो बोलीं, ‘बहुत ठंड लग रही है, रजाई ओढ़ा दो।’ मैंने दो रजाई ओढ़ाईं लेकिन थोड़ी देर बाद फिर बुलाया, ‘अभी भी ठंड लग रही है।’ मैं परेशान हो गया, डॉक्टर बुलाने की बात की तो मना कर दिया। तभी मेरे मन में शैतानी ख्याल आया। मैंने कहा, ‘भाभी, ठंड हाथ-पैर से शरीर में जाती है। अगर बुरा न मानो तो मैं मालिश कर दूं?’ वो बोलीं, ‘जो करना है करो, बस ठंड खत्म कर दो।’
मैंने उनका हाथ पकड़ा, हथेली रगड़ने लगा। उन्हें अच्छा लग रहा था। फिर पैरों की मालिश की, पंजों को दबाया। धीरे-धीरे वो आराम महसूस करने लगीं लेकिन मैं देख रहा था कि उनकी जांघें नाइट गाउन से झांक रही थीं। मेरा लंड कड़क हो गया। वो सोने का नाटक कर रही थीं, मैं समझ गया। फिर बोलीं, ‘अभी भी ठंड है, कुछ करो ना।’ मैंने हिम्मत की और उनकी रजाई में घुस गया, पीठ से चिपक गया। सिर्फ ठंड मिटाने के लिए, लेकिन मेरा लंड उनकी गांड से सटा हुआ था। धीरे-धीरे उन्हें अच्छा लगने लगा। दवाई का असर था, वो गहरी नींद में चली गईं लगता था।
मैंने मौका देखकर उनके गाउन के ऊपर से चुचों पर हाथ रखा। कोई विरोध नहीं। धीरे से बटन खोले, एक-एक करके सारे खोल दिए। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। मैंने अपने कपड़े उतार दिए, सिर्फ अंडरवियर में था। उन्हें चिपककर सो गया। सुबह नींद खुली तो मैं उनके बेड पर था लेकिन भाभी नहीं थीं। बाहर गया तो किचन में थीं। मैंने सॉरी बोला, रात की बात बताई। बहुत मनाने पर वो मानीं और बोलीं, ‘ठीक है, लेकिन अगली बार ऐसा मत करना।’ हमने साथ नाश्ता किया। मैं उनकी आंखों में नहीं देख पा रहा था।
दोपहर को रोहन कोचिंग चला गया। हमने लंच किया। फिर भाभी बोलीं, ‘मैं नहाने जा रही हूं।’ नहाकर नाइट गाउन में निकलीं। मैं उनके रूम में था, उठकर जाने लगा तो बोलीं, ‘कहां जा रहे हो? यहीं रहो। कल रात तो सब देख लिया।’ फिर बिना रुके गाउन उतार दिया। ब्रा-पैंटी में थीं। मैं उन्हें देखता रह गया। वो बोलीं, ‘ब्लाउज देना।’ मैंने देते हुए उनके गीले हाथ को छुआ। वो मुस्कुराईं, ‘क्या घूर रहे हो?’ मैंने कहा, ‘भाभी, आप बहुत सेक्सी हो।’ वो हंसकर बोलीं, ‘अब क्या करोगे?’
यह ग्रीन सिग्नल था। मैंने उन्हें बाहों में भरा, होंठों पर होंठ रख दिए। वो जवाब दे रही थीं। मैंने ब्रा उतारी, बड़े-बड़े चुचे बाहर आए, गुलाबी निप्पल कड़े। मैंने चूसना शुरू किया, एक को मुंह में लेकर चूसा, दूसरे को मसला। भाभी की सांसें तेज, ‘आह्ह राहुल… चूस… जोर से…’ मैं नीचे गया, पैंटी उतारी। उनकी चूत पर हल्के बाल, गुलाबी, गीली। मैंने जीभ डाली, क्लिट चाटी। वो कमर उठाकर चीखीं, ‘आह्ह… अच्छा लग रहा है… चाट… जीभ अंदर डाल…’ मैंने जोर-जोर से चाटा, चपचप की आवाज आई। वो झड़ गईं, रस मेरे मुंह में।
अब मेरी बारी। मैंने अंडरवियर उतारा, मेरा 8 इंच का लंड खड़ा। भाभी ने पकड़ा, सहलाया, ‘वाह राहुल, कितना मोटा है।’ मुंह में लिया, चूसने लगीं, ग्ग्ग्ग… गोंग… मैंने उनका सिर दबाया, गले तक डाला। वो खांस रही थीं लेकिन चूसती रहीं। फिर मैंने उन्हें लिटाया, टांगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा, धीरे से धक्का मारा। टोपा अंदर गया। भाभी चीखीं, ‘आह्ह… धीरे… मोटा है…’ मैंने धीरे-धीरे पूरा डाला। वो ‘आह्ह… फाड़ दो… चोद मुझे…’ कह रही थीं।
मैंने स्पीड बढ़ाई। ठपठप… ठपठप… चपचप… हर धक्के में उनकी चूत कस रही थी। मैंने मिशनरी में पेला, फिर डॉगी में। उनकी गांड पकड़कर जोर-जोर से चोदा। वो चिल्ला रही थीं, ‘हां राहुल… चोद… मेरी चुत फाड़… आह्ह… लंड अंदर तक… ऊईई…’ मैंने उनके चुचे दबाए, निप्पल काटे। वो कई बार झड़ीं, मैं रुका नहीं। आखिर मैंने जोर का धक्का मारा और अंदर झड़ गया, गर्म वीर्य उनकी चूत में। हम दोनों हांफ रहे थे।
उसके बाद हमने कई बार चुदाई की। भाई आने से पहले तक रोज रात को चोदता रहा। कभी किचन में, कभी बाथरूम में। भाभी अब मेरी चुदक्कड़ बन गई थीं। वो कहतीं, ‘राहुल, तूने मेरा बुखार उतारा, अब मेरी प्यास बुझाता रह।’ मैं भी हर बार लंड डालकर उन्हें संतुष्ट करता। अब जब भी मौका मिलता है, दिल्ली जाता हूं और भाभी के साथ चुदाई का मजा लेता हूं। यह मेरी जिंदगी की सबसे गर्म याद है।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।