यह मेरी जिंदगी की एक सच्ची घटना है, जिसे मैंने हमेशा अपने दिल में दबाकर रखा था और कभी किसी से शेयर नहीं करना चाहता था, लेकिन अब सोचा कि बता ही दूं। यह एक देसी xxx कहानी है, xxx भाभी चुदाई कहानी जो मेरे साथ हुई। बात आज से छह महीने पहले की है, जब हमारे घर में नए किराएदार आए थे। मैं उन्हें भैया और भाभी कहकर बुलाता था। धीरे-धीरे उनसे मेरी अच्छी दोस्ती हो गई और मैं उनके काफी करीब आ गया। भैया ज्यादातर बाहर ही रहते थे, कभी चंडीगढ़, कभी आगरा, कभी कहीं और। एक दिन ऐसा हुआ कि भैया बाहर गए हुए थे और मेरे घरवाले भी लखनऊ से बाहर चले गए थे। उन्होंने कमरे की चाबी भाभी को दे दी थी। घरवालों ने मुझे फोन करके बता दिया कि चाबी भाभी के पास है। मैं घर पहुंचा और सीधा भाभी के कमरे की घंटी बजाई। भाभी बाहर आईं, उस वक्त उन्होंने नीला रंग का डीप नेक सूट पहना हुआ था, सिर पर दुपट्टा नहीं था। भाभी का फिगर कमाल का था, लगभग 36-32-36। ब्रा इतनी टाइट थी कि उनके बूब्स बाहर आने को बेताब लग रहे थे। मैंने देखा तो मेरी नजरें ठहर गईं, लेकिन मैंने खुद को संभाला।
मैंने कहा, ‘भाभी, चाबी चाहिए।’ भाभी ने मुस्कुराकर कहा, ‘अंदर आ जाओ, मैं चाबी लाती हूं।’ लेकिन इत्तेफाक से भाभी चाबी रखकर भूल गईं। थोड़ी देर बाद वो आईं और बोलीं, ‘चाबी तो पता नहीं कहां रख दी, भूल गई।’ मैंने कहा, ‘भाभी, चाबी तो चाहिए, नहीं तो रात को कहां सोऊंगा?’ भाभी ने कहा, ‘ठीक है, मैं एक बार और अच्छे से देख लेती हूं।’ यह कहकर वो सोफे पर बैठ गईं और मुझसे बातें करने लगीं। फिर फ्रिज से पेप्सी निकालकर लाईं और मुझे दी। मैंने कहा, ‘आप भी लीजिए।’ भाभी बोलीं, ‘नहीं, मैं नहीं लूंगी। सुबह से सिर दर्द हो रहा है।’ मैं उठकर उनके पास गया और बोला, ‘भाभी, मैं आपका सिर दबा देता हूं।’ भाभी ने मना किया, ‘नहीं, तुम तकलीफ मत करो, मैं दवा ले लूंगी।’ लेकिन मैंने जोर दिया, ‘भाभी, क्या मुझे इतना भी हक नहीं कि आपका सिर दबा सकूं?’ आखिरकार भाभी मान गईं। मैं सोफे पर चढ़ गया और उनका सिर दबाने लगा। इस तरह से दबा रहा था कि मेरी जांघ उनकी पीठ से टच हो रही थी। भाभी की खुशबू, उनके बालों की महक, सब कुछ मुझे मदहोश कर रहा था। मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। ऊपर से उनका डीप नेक ब्लाउज, जिसमें से उनकी चूचियां साफ झलक रही थीं। मैं धीरे-धीरे सिर दबाता रहा, भाभी की आंखें बंद हो गईं, वो रिलैक्स हो रही थीं।
भाभी मदहोश सी होती जा रही थीं। फिर मैंने मौका देखकर उन्हें अपनी बाहों में ले लिया और सोफे पर लेट गया। भाभी चौंककर उठीं और बोलीं, ‘यह क्या कर रहे हो?’ मैंने कहा, ‘भाभी, आप मुझे बहुत पसंद हैं, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं।’ भाभी ने शरमाते हुए कहा, ‘वा जी वा, बड़ा आया प्यार करने वाला। प्यार करने वाले इतनी देर नहीं लगाते।’ मैंने देखा तो उनकी सलवार नीचे से खुली हुई थी। मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया। मैं लग गया काम पर। पहले उनके होंठों को चूस-चूसकर लाल कर दिया। उनके होंठ इतने नरम थे, जैसे रसभरी। मैं चूसता रहा, भाभी भी साथ देने लगीं। फिर मैंने कहा, ‘भाभी, कभी लंड का स्वाद चखा है?’ भाभी बोलीं, ‘छी, मुझे तो घिन आती है।’ मैंने कहा, ‘घिन किस बात की? विदेशों में तो ये आम है। वो लोग पहले लंड चुसवाते हैं, नहीं तो उनका खड़ा नहीं होता।’ भाभी ने कहा, ‘जैसे भी हो, मैं नहीं चूसूंगी।’ मैंने कहा, ‘ठीक है, आज नहीं तो कल पता चलेगा इसके स्वाद का।’ फिर मैं खड़ा हुआ, मेरी पैंट खोली, लंड निकाला। मेरा लंड 6 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है। भाभी ने देखा तो मुस्कुराईं, ‘तुम्हारा लंड तो बहुत तगड़ा है।’ मैंने कहा, ‘अरे, खाते-पीते घर का है।’ मैं उनके पास खड़ा हो गया।
मैंने खड़े-खड़े भाभी की चुत पर हाथ फेरा। भाभी इतनी गर्म हो चुकी थीं कि बोलीं, ‘जल्दी डालो।’ मैंने कोशिश की, लेकिन खड़े-खड़े नहीं हो पाया। फिर एक कुर्सी पर बैठ गया। मैंने कहा, ‘भाभी, अब मेरे ऊपर आ जाओ।’ भाभी मेरे लंड पर बैठ गईं और गांड हिलाने लगीं। उनकी चुत गीली थी, लंड आसानी से अंदर चला गया। भाभी ऊपर-नीचे होने लगीं, मैं उनके बूब्स दबा रहा था। थोड़ी देर बाद मेरा झड़ने वाला था। भाभी ने पहले ही कहा था, ‘अंदर मत झड़ना, दिक्कत हो जाएगी।’ मैंने लंड निकाला और दीवार पर पिचकारी मार दी। उस दिन हमने 5 बार चुदाई की। हर बार अलग-अलग पोज में। पहले कुर्सी पर, फिर सोफे पर, फिर फर्श पर। भाभी की चीखें, उनकी सिसकारियां, सब कुछ यादगार था। मैं उनकी चुत चाटता, वो मेरे लंड को सहलातीं। हम दोनों पसीने से तर हो गए थे, लेकिन रुके नहीं।
यह सिलसिला 4 महीने तक चला। जब भी मौका मिलता, हम चुदाई करते। कभी भैया बाहर जाते, तो रात भर हम साथ रहते। एक बार तो भैया रात को आने वाले थे, लेकिन ट्रेन लेट हो गई, हमने पूरी रात चुदाई की। भाभी की चुत हर बार नई लगती। मैं उनके बूब्स चूसता, निप्पल काटता, वो कहतीं, ‘आह, धीरे करो।’ लेकिन मजा दोनों को आता। कभी मैं उन्हें गोद में उठाकर चोदता, कभी डॉगी स्टाइल में। भाभी कहतीं, ‘तुम्हारा लंड बहुत मोटा है, दर्द होता है लेकिन मजा भी आता है।’ हम दोनों के बीच एक गहरा रिश्ता बन गया था, लेकिन सिर्फ शारीरिक। भावनाएं भी जुड़ गईं थीं।
लेकिन 2 महीने पहले भाभी ने कमरा बदल लिया। भैया को कार पार्किंग की समस्या थी, इसलिए उन्होंने नई जगह ले ली जहां पार्किंग अच्छी थी। अब 15-20 दिन में एक-दो बार मौका मिलता है। कभी मैं उनके नए घर जाता हूं, कभी वो मेरे पास आती हैं। लेकिन वो उतना मजा नहीं आता जितना पहले। हम अब भी चुदाई करते हैं, लेकिन सावधानी से। भाभी कहती हैं, ‘अब ज्यादा रिस्क नहीं ले सकते।’ लेकिन जब मिलते हैं, तो जमकर करते हैं।
मेरी राय है औरतों के बारे में कि सेक्स करते वक्त उन्हें पूरी तरह नंगी मत करो। एक पर्दा होना चाहिए जो उत्तेजना बढ़ाए। जैसे मैंने भाभी के साथ किया। कभी ब्रा में चोदा, कभी सूट ऊपर करके उनकी चूचियां चूसीं, कभी साड़ी का पेटीकोट ऊपर करके चुत मारी। सबसे ज्यादा मजा साड़ी में आता है। साड़ी उतारो, पैंटी नीचे सरकाओ, पेटीकोट ऊपर चढ़ाओ और खड़े-खड़े चोदो। या गोद में उठाकर। आनंद आता है। मैंने भाभी को हर तरह से चोदा। कभी बालकनी में, जहां हल्की हवा चल रही होती, कभी किचन में खाना बनाते वक्त। एक बार तो बाथरूम में शावर के नीचे। पानी की बूंदें उनके बदन पर गिरतीं, मैं उनके बूब्स दबाता, चुत में उंगली करता। भाभी की सिसकारियां, ‘आह, और जोर से।’ मैं उनका पूरा बदन चूमता, गर्दन से लेकर पैरों तक। उनके पैरों की उंगलियां चूसता, वो कांप जातीं। फिर लंड उनकी चुत में डालता, धक्के मारता। हर धक्के के साथ उनकी चुत टाइट होती, रस बहता। हम घंटों करते रहते। कभी मैं उनके मुंह में झड़ता, लेकिन वो शुरू में मना करतीं, बाद में मान गईं। कहतीं, ‘तुम्हारा स्वाद अच्छा है।’ हमने पोर्न देखकर नए-नए पोज ट्राई किए। 69 पोजिशन में मैं उनकी चुत चाटता, वो मेरा लंड चूसतीं। मजा दोगुना हो जाता।
यह मेरा अनुभव है। मेरी कहानी कैसी लगी, बताना। अब भी कभी-कभी याद आती है वो शुरुआती दिन। भाभी अब भी कॉल करती हैं, मिलने बुलाती हैं। लेकिन जीवन चलता है। मैंने सीखा कि रिश्ते कैसे बनते हैं, कैसे टूटते हैं। लेकिन वो पल हमेशा याद रहेंगे। धन्यवाद।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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