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भाभी ने मुझे अपनी हवस की जाल में फंसा लिया

February 22nd, 2026 - 5:10 PM
in Bhabhi Sex
Reading Time: 1 min read
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नमस्ते, मेरा नाम राजेश है। मेरी उम्र 20 साल है। आज मैं आपको अपनी एक ऐसी xxx भाभी चुदाई कहानी सुना रहा हूं, जो देसी xxx कहानी की तरह हॉट और मसालेदार है, वो भी मेरी जिंदगी की सच्ची घटना जो मैंने हमेशा छिपाकर रखी थी, कभी किसी को बताने की हिम्मत नहीं हुई। मेरे घर में चार भाई हैं और पापा हैं, मां का स्वर्गवास तब हो गया था जब मैं सिर्फ 9 साल का था। मेरे दो भाई बैंगलोर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि सबसे बड़ा भाई हमारे साथ ही जयपुर में रहता है। जब मेरे बड़े भाई की शादी हुई, तो मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि मां का जो प्यार नहीं मिला, वो शायद भाभी से मिल जाएगा। शादी के बाद भाभी हमारे साथ ही रहने लगीं। हम शहर के सबसे बड़े परिवारों में से एक हैं। पापा का ख्याल रखने के लिए नौकर तो था, लेकिन नौकर और परिवार के सदस्य में जमीन-आसमान का फर्क होता है। भाभी मुझसे अक्सर मजाक किया करती थीं, कभी मेरे बाल खींचतीं, कभी गुदगुदी करतीं, और मैं भी उनके साथ हंस-हंसकर खेलता रहता। कभी-कभी वो मुझे गले लगा लेतीं, और उनकी वो नरम छाती की गर्माहट मुझे अजीब सा सुकून देती, लेकिन तब मैं समझ नहीं पाता था कि ये क्या हो रहा है। घर का माहौल खुशहाल था, लेकिन अंदर ही अंदर कुछ बदलाव आ रहे थे जो मैं महसूस कर रहा था।

एक दिन की बात है, मैं बाथरूम में नहाने जा रहा था। मैंने भाभी से अपनी अंडरवियर और बनियान मांगी। भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘देवर जी, तुम नहाना शुरू करो, मैं ढूंढकर लाती हूं।’ मैंने ठीक है कहकर अंदर चला गया। नहाकर मैं सिर्फ एक पतला टॉवल लपेटे खड़ा था, तभी भाभी आईं और बोलीं, ‘लो अपनी अंडरवियर।’ वो दरवाजे के बाहर से हाथ बढ़ा रही थीं। जैसे ही मैंने दरवाजा थोड़ा खोला और हाथ बढ़ाया, भाभी ने जोर से धक्का दिया और अंदर घुस आईं। फिर क्या, वो मेरी कमर पर गुदगुदी करने लगीं, हंसते हुए कहने लगीं, ‘देखो देवर जी, कितने गुदगुदे हो तुम।’ मैं हंसते-हंसते छटपटा रहा था, लेकिन उनका हाथ मेरी कमर से नीचे सरक रहा था, और मैं असहज महसूस कर रहा था। वो नहीं रुक रही थीं, उनकी उंगलियां मेरी जांघों पर फिसल रही थीं, और मैं रोकने की कोशिश कर रहा था लेकिन मजाक समझकर हंस भी रहा था।

उस मजाक में वही हो गया जिसका मुझे डर था। मेरा टॉवल खुल गया और भाभी के हाथ में मेरा लंड आ गया। मैं शर्म से लाल हो गया, मेरी सांसें रुक गईं। भाभी की आंखों में एक अजीब सी चमक थी, वो मेरे लंड को देखकर मुस्कुरा रही थीं। मैं जल्दी से बाथरूम से नंगा ही बाहर भागा, क्योंकि घर में उस वक्त सिर्फ हम दोनों थे। मैं अपने कमरे में जाकर कपड़े पहने और पूरे दिन भाभी से बात नहीं की। शाम को भाभी मेरे पास आईं, मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोलीं, ‘सुरेश, तुम मुझसे नाराज हो क्या?’ उनकी आवाज में एक मासूमियत थी, लेकिन मैं जानता था कि ये सब प्लान था। मैंने नाराजगी छोड़ते हुए कह दिया, ‘नहीं भाभी, बस थोड़ा शर्म आ गई थी।’ लेकिन अंदर से मैं उलझन में था, रात भर नींद नहीं आई, बार-बार वो पल याद आता रहा।

अगले दिन मैं पढ़ाई कर रहा था, तभी भाभी नहाने जा रही थीं। जाते-जाते बोलीं, ‘राजेश, कल की बात का बदला लेने की कोशिश मत करना।’ मैंने हंसकर कहा, ‘नहीं भाभी, मैं तो वो बात भूल चुका हूं।’ लेकिन मन में कुछ और ही चल रहा था। नहाते हुए भाभी चिल्लाईं, ‘राजेश, मुझे साबुन लाकर दो, मेरा खत्म हो गया।’ मैंने कहा, ‘अभी दुकान से नहीं ला सकता।’ भाभी बोलीं, ‘ड्रॉर से ला दो।’ मैं साबुन लेकर गया, भाभी दरवाजे से झांक रही थीं। जैसे ही मैंने हाथ बढ़ाया, भाभी ने मेरा हाथ पकड़कर खींच लिया। मैं बाथरूम में गिरने लगा, लेकिन भाभी ने मुझे संभाला। उस वक्त मेरा हाथ उनकी चुत पर पड़ गया। मैंने देखा, भाभी पूरी नंगी थीं, उनके बड़े-बड़े बूब्स, गुलाबी निप्पल, और चुत पर घने बाल। वो दृश्य मेरी आंखों में बस गया, मैं स्तब्ध खड़ा था, मेरी सांसें तेज हो गईं, और शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल गई। भाभी मुस्कुरा रही थीं, जैसे ये सब जानबूझकर किया हो।

तभी मुझे अपनी पैंट में कुछ महसूस हुआ। देखा तो भाभी ने मेरी पैंट और अंडरवियर उतार दी थी। मैं उनके सामने नंगा खड़ा था। भाभी मेरे लंड को बड़े मजे से चूसने लगीं, उनकी जीभ लंड के टोपे पर घूम रही थी, गर्म सांसें लग रही थीं। फिर भाभी नीचे लेट गईं, 69 की पोजीशन में। वो मेरा लंड चूस रही थीं, और मैं उनकी बालों वाली चुत चाट रहा था। चुत का स्वाद नमकीन था, गर्म रस टपक रहा था। थोड़ी देर बाद भाभी उठीं और बोलीं, ‘जानू, अपना 7 इंच का लंड मेरी चुत में डालो।’ मैं कांप रहा था, लेकिन उनकी आंखों में वो हवस देखकर मैं रुक नहीं पाया। मैंने लंड चुत पर रगड़ा, धीरे-धीरे अंदर सरकाने की कोशिश की, लेकिन वो फिसल रहा था। भाभी ने साबुन लगाया, लंड पर और चुत पर, फिर बोलीं, ‘अब धक्का दो।’

मैंने जैसे ही लंड चुत पर रखकर जोर से धक्का दिया, वो फिसलकर पीछे चला गया। भाभी बोलीं, ‘ऐसे नहीं जानू।’ फिर साबुन लगाकर लंड पर रगड़ीं, चुत पर भी। अब मैंने जोर से धक्का मारा, भाभी चिल्लाईं, ‘आआह्ह्ह्ह… ईईई… ऊऊऊ…’ मैंने एक और झटका दिया, पूरा लंड चुत में समा गया। हमारे शरीर रगड़ने लगे, चुत की गर्मी लंड को जला रही थी। मैं धक्के मारता रहा, भाभी की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। उस दिन भाभी ने मुझे पहली बार सेक्स सिखाया, हर पोजीशन, हर तरीका। हम घंटों करते रहे, मैं थक गया लेकिन भाभी नहीं रुक रही थीं। चुदाई की वो रात मेरी जिंदगी बदल गई।

लेकिन उस सेक्स के बाद मुझे पछतावा हुआ। मैंने सोचा ये गलत है, भाभी से ऐसा नहीं करना चाहिए। मैंने संकल्प लिया कि दोबारा नहीं करूंगा, चाहे भाभी कितना उकसाएं। एक दिन मैं बाजार गया, सामान लेने, लेकिन पैसे भूल गया। वापस घर आया तो देखा भाभी नौकर के साथ चिपकी हुई थीं। मुझे देखकर अलग हुईं, नौकर चला गया। मैंने पूछा तो भाभी बोलीं, ‘तुम्हारे भैया तो हमेशा बाहर रहते हैं, मुझे संतुष्ट नहीं करते। तुम भी एक बार करके छोड़ दिए। अब मैं क्या करूं?’ उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन मैं जानता था ये नाटक है। मैंने कहा, ‘भाभी, ये पाप है।’ वो बोलीं, ‘तुम मुझे खुश करो बिना पाप के।’ मैं सोच में पड़ गया, कैसे?

भाभी बोलीं, ‘मुझे ऐतराज नहीं, लेकिन पाप न हो।’ मैं बोला, ‘कैसे?’ वो मुझे कमरे में ले गईं, मेरे होंठ चूमने लगीं। मैंने मना किया तो बोलीं, ‘लंड चुत में नहीं डालूंगी।’ फिर मेरे कपड़े उतारे, खुद भी नंगी हो गईं। मेरा लंड चूसने लगीं, जोर-जोर से। मेरी नजर उनकी चुत पर गई, आज चिकनी थी, शेव की हुई। मैं रुक नहीं पाया, संकल्प भूल गया। 69 में आकर चुत चाटने लगा, जीभ अंदर-बाहर, क्लिट पर घुमाई। भाभी सिसकारियां ले रही थीं, ‘आह्ह… चाटो और… ऊऊ…’ हम दोनों पागल हो गए, चाटते-चूसते घंटों बीत गए।

फिर भाभी ने मुझे उठाया, मुंह अपने बूब्स पर रखा। मैंने दोनों को निचोड़ा, दूध पिया जैसे। निप्पल काटे, चूसे। फिर भाभी की टांगें फैलाईं, लंड चुत पर फेरा। भाभी बोलीं, ‘आआह्ह… ऊऊ… ईई…’ मैंने जोर से झटका मारा, लंड अंदर। भाभी चिल्लाईं, ‘तेज… और तेज…’ मेरा जोश दुगना हो गया। हम चोदते रहे, धक्के पर धक्का। आखिर हम साथ झड़े, रस बहा। उस दिन पहली बार से ज्यादा मजा आया। अब जब मौका मिलता है, हम ये खेल खेलते हैं, छिप-छिपकर, घर के कोनों में, रातों में। भाभी की हवस कभी खत्म नहीं होती, और मैं भी अब उसका गुलाम हो गया हूं।

यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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