हाय दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं मुंबई का रहने वाला हूं। उम्मीद करता हूं कि मेरी पिछली कहानियां आपको खूब पसंद आई होंगी। आज मैं आपको अपनी xxx Girlfriend चुदाई कहानी सुनाने जा रहा हूं, जो देसी xxx कहानी की तरह हॉट और रोमांचक है। ये वो सच्ची घटना है जो मैं हमेशा अपनी डायरी के पन्नों में दबाकर रखना चाहता था, लेकिन अब मन कर रहा है कि शेयर कर दूं क्योंकि ये मेरी जिंदगी का वो मोड़ था जिसने सब कुछ बदल दिया। कहानी मेरी नई गर्लफ्रेंड प्रिया की है। प्रिया मेरे दोस्त समीर की छोटी बहन थी और उसकी उम्र 22 साल थी। वो दिखने में बेहद खूबसूरत लगती थी, जैसे किसी फिल्म की हीरोइन। उसका फिगर 34-28-36 का परफेक्ट था, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आंखें और वो मुस्कान जो किसी को भी दीवाना बना दे। मुझे पहली नजर में ही प्रिया से प्यार हो गया था, और मन ही मन मैं सोचता रहता था कि काश कभी मौका मिले और मैं उसे चोद सकूं, उसके साथ वो इंटीमेसी महसूस कर सकूं जो सपनों में आती थी।
समीर के घर में मॉम-पापा और उसकी बहन प्रिया रहती थी। हमारा घर पास ही था, तो मैं अक्सर समीर से मिलने के बहाने उसके घर चला जाता। वहां प्रिया भी होती, कभी किचन में चाय बनाती, कभी बाल्टी में कपड़े धोती। मैं चुपके से उसे घूरता रहता, उसकी कमर की लचक देखता, उसके होंठों की नरमी पर नजर टिकाए रहता। लेकिन प्रिया हमेशा नॉर्मल बिहेव करती, बस हल्की सी स्माइल दे देती या ‘हाय अर्जुन भैया’ कहकर चली जाती। एक शाम मैं समीर से मिलने गया, लेकिन वो बाहर गया हुआ था। अंकल-आंटी भी किसी रिश्तेदार के यहां थे। घर में सिर्फ प्रिया अकेली थी, टीवी देख रही थी। मैंने हिचकिचाते हुए पूछा, ‘प्रिया, समीर कब लौटेगा?’ वो मुड़ी, थोड़ा शरमाई और बोली, ‘अभी तो नहीं, लेकिन तुम बैठो न, चाय पिला दूं?’ मैं खुश हो गया। हम बातें करने लगे – कॉलेज की, फिल्मों की, दोस्तों की। पहले तो वो थोड़ी संकोची थी, लेकिन धीरे-धीरे खुलने लगी। हंसी-मजाक चल पड़ा, और दो घंटे बीत गए पता ही न चला। जाते वक्त मैंने कहा, ‘प्रिया, तुमसे बात करना बहुत अच्छा लगता है। क्या हम फोन पर भी बात कर सकते हैं?’ उसने शरमाते हुए अपना मोबाइल निकाला और मुझे मिस्ड कॉल दे दी। घर लौटते हुए मेरा दिल धड़क रहा था, जैसे कोई खजाना मिल गया हो।
उस रात मैंने उसे मैसेज किया, ‘थैंक यू प्रिया, आज का दिन स्पेशल था।’ जवाब आया, ‘मेरा भी। गुड नाइट।’ बस, यहीं से शुरू हो गई हमारी रोज की बातें। सुबह कॉफी पीते हुए, शाम वॉक पर, रात सोने से पहले – हम एक-दो घंटे फोन पर गपशप करते। कभी वो अपनी पढ़ाई की टेंशन बताती, कभी मैं अपनी जॉब की बोरियत शेयर करता। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होने लगीं – क्रश की, किसिंग की, सेक्स के बारे में हल्के-हल्के। दो महीने बाद मैंने हिम्मत जुटाई और कहा, ‘प्रिया, चलो न कहीं बाहर घूम आएं। बस थोड़ी देर के लिए।’ वो पहले झिझकी, ‘भैया क्या कहेंगे?’ लेकिन मेरी जिद पर मान गई। हम मुंबई के जुहू बीच पर मिले। समंदर की लहरें देखते हुए हाथ पकड़े, आइसक्रीम खाई। हंसी-खुशी बीता वो दिन। फिर हमने फिल्म का प्लान बनाया। उस वक्त ‘मर्डर 2’ रिलीज हुई थी, ठीक वैसी ही बोल्ड मूवी। हमने टिकट लिए, अंदर जाकर सीट सेट की। लाइट्स डिम हुईं, और स्क्रीन पर इमरान हाशमी का हॉट सीन शुरू हो गया।
मूवी की शुरुआत में ही एक इंटेंस किसिंग सीन आया। मैंने धीरे से प्रिया की गर्दन पर हाथ रख दिया, उसके बालों को सहलाया। वो चौंकी, ‘अर्जुन, क्या कर रहे हो?’ लेकिन मैंने हाथ न हटाया। मेरी उंगलियां उसकी स्किन पर फिसल रही थीं, गर्माहट महसूस हो रही थी। स्क्रीन पर हीरोइन की सांसें तेज हो रही थीं, और मेरी प्रिया की भी। अब इमरान का बेड सीन आया, जहां वो हीरोइन को बेकाबू कर रहा था। प्रिया की सांसें मेरे कंधे पर लग रही थीं। मैंने मौका देखा और उसे जोर से पकड़ लिया, उसके गाल को छुआ और होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो पहले मना करने लगी, हाथ-पैर छुड़ाने की कोशिश की, ‘नहीं अर्जुन, यहां नहीं…’ लेकिन मैंने किस जारी रखा। मेरी जीभ उसके होंठों के बीच घुस गई, स्वाद लेने लगी। धीरे-धीरे उसका रेसिस्टेंस कम हुआ। वो शांत हो गई, फिर मेरे होंठों का जवाब देने लगी। हमारी सांसें मिल रही थीं, मूवी की आवाजें बैकग्राउंड में गूंज रही थीं। मुझे लगा जैसे आसमान में उड़ रहा हूं।
किस करते हुए मैंने फुसफुसाया, ‘प्रिया, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। तुम्हारे बिना जिंदगी अधूरी लगती है।’ वो कुछ न बोली, बस आंखें बंद करके मेरे करीब आ गई। हम पांच मिनट तक स्मूच करते रहे, होंठ सूजे हुए, सांसें तेज। फिर मेरी हिम्मत बढ़ी, मैंने हाथ उसके टॉप के अंदर डाल दिया। उसके ब्रा के ऊपर से बूब्स को छुआ – आह, कितने सॉफ्ट, गोल, जैसे रुई के गोले। मैंने धीरे से दबाया, निप्पल्स कड़े हो गए। प्रिया सिहर उठी, ‘आह अर्जुन… प्लीज…’ लेकिन उसकी आवाज में दर्द कम, मजा ज्यादा था। मेरा लंड पैंट में तन गया, दर्द करने लगा। मैंने हाथ नीचे सरकाया, उसकी जांघ पर रखा। स्किन इतनी स्मूद, जैसे सिल्क। लेकिन वो डर गई, मेरा हाथ हटा दिया, ‘नहीं, अभी नहीं। प्लीज रुको।’ मैं रुका, लेकिन मूवी के दौरान चुपके-चुपके उसके बूब्स दबाता रहा, होंठ चूमता रहा। हर टच में इलेक्ट्रिसिटी दौड़ रही थी।
फिल्म खत्म हुई तो रात के 10 बज चुके थे। बाहर अंधेरा घना, सड़कें सुनसान। हम पार्किंग में पहुंचे। मेरी कार के पास कोई न था, और कार के शीशे ब्लैक टिंटेड थे – परफेक्ट प्राइवेसी। मैंने प्रिया को अंदर खींचा, दरवाजा लॉक किया और फिर से किसिंग शुरू। अब वो पहले जितनी शरमाती न थी। शायद मूवी के सीन और मेरे टच ने उसे गर्म कर दिया था। वो खुद मेरी कमीज पकड़ रही थी, सांसें फूल रही थीं। मैंने उसके टॉप के ऊपर से बूब्स दबाए, वो आह्ह्ह… आह्ह्ह… करने लगी, कमर मरोड़ने लगी। ‘अर्जुन… ये क्या हो रहा है…’ मैंने टॉप ऊपर किया, ब्रा एक्सपोज हो गई – ब्लैक लेस वाली, सेक्सी। मैंने ब्रा के ऊपर से जीभ फेरी, निप्पल्स चाटे। स्वाद नमकीन, खुशबू उसकी बॉडी लोशन की। प्रिया की आंखें बंद, सिर पीछे। मैंने कहा, ‘जानू, चलो पीछे वाली सीट पर चलें, यहां तंग है।’ वो हिचकिचाई, लेकिन मेरी आंखों में देखकर मान गई।
पीछे सीट पर हम लेट गए। बाहर कोई हलचल न थी, सिर्फ दूर कहीं कुत्ते की भौंक। मैंने प्रिया को सीट पर लिटाया, टॉप और ब्रा पूरी ऊपर कर दी। उसके गुलाबी निप्पल्स चमक रहे थे। मैंने एक को मुंह में लिया, चूसने लगा – चपचप… चूस… आह, कितना स्वादिष्ट। प्रिया की सांसें तेज, ‘आह्ह्ह… अर्जुन… बहुत अच्छा लग रहा है…’ वो मस्त हो रही थी, बाल मेरे सिर पर फिरा रही थी। अब मेरी हिम्मत और बढ़ी। मैंने हाथ नीचे सरकाया, उसके लोअर की चेन खोली। वो मना करने लगी, ‘नहीं… प्लीज… शरम आ रही है।’ लेकिन मैं कहां मानने वाला। लोअर नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में थी, टांगें लंबी, गोरी। पैंटी पर गीलापन साफ दिख रहा था। मैंने पैंटी को किस किया, नाक से सूंघा – उसकी चूत की खुशबू, मादक। प्रिया सिहर उठी, ‘आह्ह्ह्ह… मत करो…’
मैंने पैंटी धीरे से नीचे की। प्रिया की चूत एक्सपोज – साफ-सुथरी, गुलाबी, हल्के बाल। देखते ही मेरा लंड फटने को था। मैंने उंगली से क्लिट को छुआ, फिर धीरे से चूत में डाली। कितनी टाइट! प्रिया चीखी, ‘आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… निकालो…’ लेकिन मैं रुका न। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, चपचप की आवाज आने लगी। फिर मैं घुटनों पर बैठा, जीभ से चूत चाटने लगा। जीभ क्लिट पर घुमाई, होंठों से चूसा। प्रिया की टांगें कांपने लगीं, ‘आह्ह्ह देव… प्लीज मत करो… आह्ह्ह… कुछ हो रहा है…’ उसकी चूत से रस बहने लगा, गीली हो गई पूरी। मैंने और जोर से चाटा, दो उंगलियां डालीं। वो तड़प रही थी, कमर ऊपर उठा रही। फिर मैंने अपनी पैंट उतारी, अंडरवियर भी। मेरा 7 इंच का मोटा लंड बाहर आया, टोपा चमक रहा। प्रिया ने घूरा, आंखें फैलीं। मैंने कहा, ‘प्रिया, इसे छुओ। चूसो न।’ वो मना करने लगी, लेकिन मैंने सिर पकड़ा, लंड मुंह में डाल दिया।
पहले तो प्रिया घबरा गई, खांसने लगी। मेरा लंड उसके मुंह में आधा भी न समा रहा था। लेकिन मैंने धक्के मारे, गले तक पहुंचाया। ग्ग्ग… गोंग… की आवाजें। लार टपक रही थी। धीरे-धीरे वो समझ गई, खुद से चूसने लगी। जीभ टोпе पर घुमाई, होंठों से दबाया। आह, क्या मजा! मैंने सिर पकड़कर फक किया, स्पीड बढ़ाई। प्रिया की आंखें बंद, मजा ले रही। ‘हां प्रिया… चूसो… अच्छे से…’ दस मिनट बाद मैं झड़ने को था। तेज धक्के मारे, और मुंह में ही कम हो गया। गर्म वीर्य उसके गले में उतर गया। प्रिया खांसी, लेकिन निगल लिया। बोली, ‘पहली बार… स्वाद अजीब है, लेकिन अच्छा।’ उसके होंठों पर वीर्य चिपका था। मैंने रुमाल से साफ किया, अपना लंड भी। फिर कार स्टार्ट की, लेकिन मन न मन भरा।
रात के 1 बजे थे। प्रिया को घर छोड़ने जा रहा था, तभी रास्ते में वो खुद मुझे किस करने लगी। होंठ चूस रही, हाथ मेरी जांघ पर। समझ गया – उसकी चूत में आग लगी है। वो लंड चाह रही है। मौका था, सुनसान रोड। मैंने पास की एक सोसाइटी में कार घुमाई, एक कोने में पार्क की जहां अंधेरा था। आसपास और कारें खड़ी थीं, लेकिन खाली। ब्लैक शीशे सब छुपा रहे थे। मैंने प्रिया को पीछे बुलाया, ‘जानू, अब रुको मत।’ उसको किस किया, टॉप उतारा, ब्रा खोली। बूब्स बाहर – बड़े, भारी। चूसे, काटे। फिर लोअर, पैंटी सब उतार दिया। प्रिया नंगी लेटी, शरम से लाल। मैंने दस मिनट तक चाटा – चूत, निप्पल्स, गर्दन। वो तड़प रही, ‘आह्ह्ह… अर्जुन… और करो…’
मैं भी नंगा हो गया। लंड फिर तना। बोला, ‘प्रिया, आज मैं तुझे पूरी तरह अपना बना लूंगा। चोदूंगा तुझे।’ वो घबरा गई, ‘नहीं प्लीज… डर लग रहा है। अभी नहीं।’ लेकिन मैंने सुना न। उसे लिटाया, टांगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा, टोपा अंदर करने की कोशिश। स्लिप हो गया दो-तीन बार। फिर जोर से धक्का मारा – आधा लंड अंदर। प्रिया चीखी, ‘आअह्ह्ह… दर्द… फट गई… रोना आ रहा है।’ आंसू बहने लगे। मैंने स्मूच किया, होंठ चूसे, ‘शशश… प्यार से होगा।’ धीरे-धीरे धक्के मारे। खून की हल्की लकीर निकली – उसकी वर्जिनिटी। अब पूरा लंड अंदर। स्पीड बढ़ाई, ठप ठप… चपचप… प्रिया का दर्द कम हुआ, ‘आह्ह्ह… अब अच्छा लग रहा… और जोर से…’ वो कमर उठा रही, चुदवाती हुई। ‘हां अर्जुन… फाड़ दो… चोदो जोर से…’
मैंने पोजीशन बदली – मिशनरी से डॉगी। प्रिया घुटनों पर, गांड ऊपर। चूत चमक रही, रस बह रहा। जोर-जोर से पेला, 15 मिनट तक। हर धक्के में चीखें, ‘आह्ह्ह ऊईई… झड़ रही हूं…’ वो दो बार ऑर्गेज्म हिट कर चुकी थी। फिर मैं झड़ा, लंड निकाला, चेहरे पर कम किया। प्रिया ने जीभ निकालकर चाटा, ‘तेरा वीर्य… मेरा…’ फिर मैंने उसे उल्टा किया, गांड पर थप्पड़ मारा। ‘अब गांड मारूं?’ वो हंसी, ‘ट्राई करो।’ मैंने सलाइवा लगाया, लंड दबाया। मुश्किल हुआ, लेकिन घुस गया। टाइट गांड, दर्द मेरे लंड को भी। लेकिन जोश में पेलता रहा, कुतिया स्टाइल में। प्रिया चिल्लाई, ‘आह्ह्ह… गांड फट रही… लेकिन मजा आ रहा…’ पांच मिनट बाद गांड में ही झड़ गया।
अब लंड थक चुका था, चूत में डालने की सोच लेकिन खड़ा न हुआ। हिम्मत भी न रही। हमने कपड़े पहने, हंसे-बोले। कार स्टार्ट की, घर ड्रॉप किया। प्रिया बोली, ‘अर्जुन, आज की रात कभी न भूलूंगी।’ अब हमारी लाइफ चेंज हो गई। हर वीकेंड कार में मिलते, चुदाई का धमाल। कभी चूत, कभी गांड। मुझे उसकी गांड मारने में ज्यादा मजा आने लगा – टाइटनेस, वो स्क्रीम्स। प्रिया चुदक्कड़ बन गई, हमेशा चुदवाने को तैयार। रियली, ये लाइफ ड्रीम जैसी है।
दोस्तों, ये थी मेरी कहानी। उम्मीद है पसंद आई। धन्यवाद।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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