यह मेरी वो सच्ची कहानी है जो मैं हमेशा छुपाकर रखना चाहता था, लेकिन आज दिल कर रहा है कि सबको बता दूं। xxx हॉट देसी स्टोरी सुनने के लिए तैयार हो जाओ दोस्तों। मैं जब 19 साल का हुआ तो सेक्स की ऐसी आग लगी कि हर वक्त बस यही सोचता रहता। मेरा लंड किसी भी हॉट औरत की बॉडी देखकर तुरंत खड़ा हो जाता। पड़ोस में रहने वाली आंटी राधिका मुझे बहुत भाती थीं। उनकी उम्र 42 साल थी लेकिन दिखतीं 35-36 की ही लगती थीं। उनका फिगर 38-36-48 का था, जब सूट पहनकर आतीं तो बस देखते रह जाते।
उन दिनों मेरे पास कमाई का कोई साधन नहीं था इसलिए पैसे कमाने के लिए मैं 55 Game खेला करता था। मैंने इस लिंक से ज्वाइन किया था, ज्वाइन करते ही पहले 100 रुपये डिपॉजिट पर मुझे 500 रुपये एक्स्ट्रा मिले और मैं 600 रुपये आसानी से निकाल लिया करता था। आज भी मैं इसी सीक्रेट ट्रिक से खेलता हूं और अच्छा-खासा कमाता हूं।
आंटी के घर में उनके पति और तीन बच्चे रहते थे। मैं अक्सर उनके घर जाता, उनकी गांड देखकर मुठ मार लेता लेकिन अब बस मुठ से काम नहीं चल रहा था। मुझे उनकी चूत चखनी थी, चोदना था। तीन महीने तक मौका नहीं मिला लेकिन एक दिन वो मौका आ गया। मैं किसी बहाने से उनके घर गया। गेट खुला था, आवाज लगाई कोई जवाब नहीं। फिर आगे बढ़ा तो बाथरूम की तरफ से पानी की आवाज आई। जैसे ही पास पहुंचा मेरी सांसें थम गईं। आंटी पूरी नंगी गांड मटकाते हुए बाथरूम में जा रही थीं। गेट ठीक से बंद नहीं हुआ था। मेरा लंड फटाफट खड़ा हो गया। पहली बार किसी औरत को ऐसे देख रहा था।
मैं गेट के छेद से झांकने लगा। आंटी गाना गुनगुना रही थीं, शावर चला कर साबुन लगा रही थीं। अपने बड़े-बड़े बूब्स दबा रही थीं, फिर बैठ गईं और चूत में उंगली डालने लगीं। मैं जोश में आ गया, पैंट खोलकर मुठ मारने लगा। आंटी अपनी चूत में उंगली अंदर-बाहर कर रही थीं, आहें भर रही थीं। 10 मिनट बाद वो झड़ गईं, मैं भी गेट पर ही झड़ गया और जोर से आह निकल गई। आंटी ने सुना, भागकर गेट खोला। मैं सम्भल नहीं पाया, वो मेरे सामने नंगी खड़ी थीं। मैं उन्हें निहार रहा था, वो मेरे लंड को देख रही थीं जो 7 इंच का मोटा था।
आंटी ने जल्दी टॉवल लपेटा और पूछा, “तू यहां कैसे?” मैंने कहा कुछ सामान लेने आया था। वो बोलीं, “तो पैंट उतारकर क्या कर रहा था?” मैं चुप रहा। फिर पूछा कितनी देर से यहां है। मैंने कहा जब से आप नहाने गईं। वो बोलीं, “सच बता क्या देखा?” मैंने हिम्मत करके कहा सब देख लिया। वो बोलीं, “शरम नहीं आई?” मैंने कहा थोड़ी आई। फिर वो मुझे पकड़कर बेडरूम में ले गईं और बोलीं, “तेरे पापा को बताऊंगी।” मैंने मिन्नत की, माफ कर दो। वो बोलीं, “एक काम करेगा तो चुप रहूंगी।” मैंने पूछा क्या? वो बोलीं, “मुझे खुश कर।” मैं समझ गया। वो मुझे बेड पर लिटाकर चूमने लगीं।
उनके रसीले होंठों का स्वाद अनोखा था। मैंने भी उन्हें कसकर पकड़ा और चूमने लगा। 15 मिनट तक हम ऐसे ही चूमते रहे। फिर आंटी ने मेरे पूरे बदन पर किस करने शुरू किए, हाथ से लंड सहलाने लगीं। मुझे मजा आने लगा। वो मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगीं, जैसे भूखी शेरनी हो। मैं सातवें आसमान पर था। वो रंडी की तरह चूस रही थीं, मैं आहें भर रहा था। 15 मिनट बाद मैं उनके मुंह में झड़ गया। उन्होंने सारा वीर्य पी लिया, लंड चाटकर साफ किया। फिर लेट गईं।
अब मैं उनके बूब्स दबाने लगा, चूसने लगा। एक चूसता, एक दबाता। वो आह उफ्फ कर रही थीं। मैंने उनके बूब्स चूस-चूसकर लाल कर दिए। थोड़ा दूध भी निकला, मैंने पी लिया। फिर नीचे आया, उनकी चूत सूंघी। बहुत मादक खुशबू थी। चूत गीली हो चुकी थी। मैंने टांगें खोलीं और जीभ से चाटना शुरू किया। वो चिल्लाईं, “आह मेरे बेटे चोद दे अपनी आंटी को… ऊह्ह आह्ह… फाड़ डाल इस चूत को… कब से प्यासी हूं तेरी ये रंडी आंटी…” मैं जंगली होकर चाटता रहा, क्लिट चूसता रहा। वो कांप रही थीं।
फिर आंटी ने कहा, “अब बस कर… लंड डाल दे… मुझे चोद…” मैंने अपना मोटा लंड उनकी चूत पर रगड़ा। टोपा अंदर सरका। वो चीखीं, “आह्ह मोटा है… धीरे…” मैंने धीरे-धीरे धक्का मारा। आधी चूत में गया। वो दर्द से कराह रही थीं लेकिन मजा भी ले रही थीं। मैंने पूरा धक्का मारा, लंड अंदर चला गया। वो चिल्लाईं, “आह्ह फट गई… लेकिन मजा आ रहा है… चोद मुझे…” मैंने स्पीड बढ़ाई। ठपठप ठपठप की आवाज आने लगी। उनकी चूत गीली-गीली थी, लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। उनकी गांड ऊपर की, लंड पीछे से डाला। जोर-जोर से पेलने लगा। वो चिल्ला रही थीं, “हां राजा… और जोर से… चोद अपनी आंटी की चूत… फाड़ दे… मैं तेरी चुदक्कड़ हूं…” मैंने उनके बूब्स पकड़े, दबाए। हर धक्के में वो कमर हिला रही थीं। मैं 20 मिनट तक ऐसे ही चोदता रहा। वो दो बार झड़ चुकी थीं। उनका रस बह रहा था। फिर मैंने उन्हें मिशनरी में लिटाया, टांगें कंधों पर रखीं और गहराई तक पेलने लगा। वो आंखें बंद करके आहें भर रही थीं, “आह्ह ऊह्ह… तेरे लंड ने मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया… और चोद… रुक मत…”
मैंने स्पीड और तेज की। ठपठप ठपठप ठपठप… कमरा उनकी चीखों और चपचप की आवाज से भर गया। मैंने उनके निप्पल काटे, चूसे। वो और उत्तेजित हो गईं। “हां चोद… मैं तेरी रंडी हूं… अपनी चूत में भर दे…” मैं 30 मिनट से ज्यादा चोद चुका था। वो बार-बार झड़ रही थीं। आखिर मैंने जोर का धक्का मारा और उनके अंदर झड़ गया। गर्म वीर्य उनकी चूत में भर गया। वो कांप रही थीं, खुशी से रो रही थीं। हम दोनों थककर लेट गए।
उस दिन के बाद हर मौके पर हम चुदाई करते। आंटी अब पूरी चुदक्कड़ बन गई थीं। जब उनके पति नहीं होते, बच्चे स्कूल जाते तो मैं उनके घर पहुंच जाता। कभी किचन में, कभी बाथरूम में, कभी बेड पर। मैंने उनकी हर पोजिशन में चोदा। कभी वो मेरे लंड को चूसतीं, कभी मैं उनकी चूत चाटता। हम दोनों की चुदाई की कोई सीमा नहीं थी। वो कहतीं, “तेरे लंड ने मुझे जवान कर दिया… पहले इतना मजा नहीं आता था…” मैं भी कहता, “आंटी आपकी चूत सबसे स्वादिष्ट है…”
एक बार तो हमने पूरे दिन चुदाई की। सुबह से शाम तक। कई बार झड़े। उनकी चूत लाल हो गई थी लेकिन वो रुकने को तैयार नहीं। “और चोद… आज पूरा दिन तेरी हूं…” मैंने उन्हें हर तरह से संतुष्ट किया। अब वो मेरी गुप्त प्रेमिका बन गई थीं। मैं उन्हें रोज चोदता, वो मुझे चुदवाती। हमारी xxx भाभी चुदाई कहानी जैसी नहीं, बल्कि आंटी चुदाई कहानी थी जो कभी खत्म नहीं होती।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।
