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ससुर जी बड़ा चुदक्कड़ निकला

February 21st, 2026 - 4:10 PM
in Bahu / Sasur
Reading Time: 2 mins read
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मेरा नाम नेहा है, और यह मेरी वह देसी xxx कहानी है जो मैंने लंबे समय तक अपने दिल की गहराइयों में दबाकर रखी थी, कभी किसी से साझा नहीं की क्योंकि यह मेरी जिंदगी का सबसे छिपा हुआ राज था। यह xxx भाभी चुदाई कहानी है जिसमें मैंने अपने ससुर जी के साथ वो सब किया जो समाज की नजरों में गलत है, लेकिन मेरी प्यास इतनी ज्यादा थी कि मैं खुद को रोक नहीं पाई। मैं लखनऊ में रहती हूं, उम्र 23 साल की थी जब मेरी शादी विजय से हुई, जो 48 साल के थे। उनकी पहली पत्नी प्रिया की सड़क हादसे में मौत हो गई थी, और उनके दो बच्चे अमित 20 साल का और पूजा 16 साल की थीं। बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ते थे, और घर में विजय, मैं और उनके पिता हरि जी, यानी मेरे ससुर रहते थे। विजय एक सरकारी कर्मचारी थे, दिन भर ऑफिस जाते थे, और मैं घर पर ससुर जी के साथ अकेली रह जाती थी।

शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन विजय की उम्र के कारण हमारी सेक्स लाइफ में वो बात नहीं थी। उनकी पहली पत्नी प्रिया के साथ सब अच्छा चल रहा था, लेकिन हादसे ने सब बदल दिया। दो महीने बाद ससुर जी ने विजय से कहा कि तेरा अकेलापन देखा नहीं जाता, तू अभी जवान है, दूसरी शादी कर ले। मैं तो सोचती थी कि शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा, लेकिन विजय की उम्र और मेरी जवानी में फर्क था, मेरी जिस्म की आग बुझ नहीं पाती थी। मैं दिन भर उदास रहती, और ससुर जी ये बात भांप गए थे। वो मुझे खुश रहने की सलाह देते, कहते बहू, हंसो-खेलो, लेकिन भला सलाह से चूत की खुजली मिटती है क्या? मैं उनकी तरफ देखती, वो 60 के आसपास थे, लेकिन अभी भी मजबूत लगते थे।

ससुर जी के बहुत जोर देने पर विजय ने मुझसे शादी की। मैं लंबी, गोरी, चौड़ी काया वाली थी, बच्चे नई मम्मी पाकर खुश थे। शादी के कुछ दिन बाद बच्चे वापस अपने हॉस्टल चले गए, विजय ऑफिस जाते, घर में सिर्फ मैं और ससुर जी। मैं जवान थी, 23 की, और विजय 48 के, उनका लंड छोटा सा, 4 इंच का, मेरी प्यास बुझाने में नाकाम। मैं उदास रहती, ससुर जी की नजरें मेरी उदासी पर थीं, वो मुझे सलाह देते, लेकिन मैं सोचती कि ये सलाह से क्या होगा। मैंने फैसला किया कि मुझे कुछ करना होगा, क्योंकि मेरी चूत की गर्मी बढ़ती जा रही थी। मैंने घर के कामों में ज्यादा समय लगाना शुरू किया, ससुर जी से बातें करती, लेकिन अंदर ही अंदर मेरी चाहत बढ़ रही थी।

शादी को 6 महीने हो गए, लेकिन मेरी चूत की आग और भड़क रही थी। एक दिन मैंने ससुर जी को नहाते देखा, उनका टॉवल गिर गया, और मैंने उनका लंड देख लिया। वो 8 इंच का, मोटा, विजय से दुगुना। मेरी आंखें फटी रह गईं, मेरी प्यास और बढ़ गई। मन में गंदे विचार आने लगे, लेकिन बहू होने के नाते हिम्मत नहीं हुई। मैंने मन में ठान लिया कि ससुर जी से चुदवाने की, लेकिन वो धार्मिक थे, टीवी पर एडल्ट प्रोग्राम देखते, लेकिन बाहर से साधु लगते। मैंने सोचा कि कैसे उन्हें उकसाऊं, मैंने उनके सामने अपना रूप बदलना शुरू किया, ज्यादा आकर्षक कपड़े पहनने लगी।

अब मैं उनके सामने पल्लू नहीं लेती थी, झाड़ू लगाते समय पल्लू गिरा देती, मेरी चूचियां साफ दिखतीं। ससुर जी देखते, लेकिन नजरें फेर लेते। मैंने ठान लिया कि उनके अंदर का शैतान जगाऊंगी। मैं महंगे सूट पहनती, रात को विजय के साथ जमकर चुदवाती, हालांकि प्यास नहीं बुझती। मैं जानती थी कि बगल के कमरे में ससुर जी हैं, वो हमारी आवाजें सुनते होंगे। मैं जानबूझकर चुदाई जैसी आवाजें निकालती, आह्ह्ह ऊह्ह्ह उउउ, फ्फ्फ। ससुर जी की नींद उड़ जाती होगी, मैं सोचती कि वो मेरे बारे में सोचते होंगे, उनका लंड खड़ा होता होगा। मैं और जोर से सिसकारियां लेती, विजय को मजा आता, लेकिन मेरा मकसद ससुर जी थे।

विजय कहते भी, सुनीता धीरे करो, बाबू जी सुनेंगे तो क्या सोचेंगे। लेकिन मैं तो यही चाहती थी। फिर विजय को 15 दिन के लिए बाहर जाना पड़ा, वो बोले अमित को बुला लें, लेकिन मैंने मना कर दिया, कहा उसकी पढ़ाई बर्बाद होगी, मैं और बाबू जी मैनेज कर लेंगे। विजय गए, अगले दिन मैंने ठान लिया कि आज ससुर जी से चुदवा कर रहूंगी। मैंने सोचा कि अब या कभी नहीं, मेरी चूत की प्यास इतनी थी कि मैं कुछ भी कर सकती थी। मैंने प्लान बनाया, और खुद को तैयार किया।

सुबह नहाई, सेक्सी नाइटी पहनी, नीचे ब्रा नहीं, सिर्फ रेड पैंटी। मैं ससुर जी के कमरे में नाश्ता ले गई। वो मेरे रूप को देखकर स्तब्ध, लेकिन नजरें फेर लीं। मैं बैठ गई, रोने लगी। ससुर जी बोले…

ससुर जी== क्या हुआ बहू, तुम रो क्यों रही हो? विजय तो सिर्फ 15 दिन के लिए गया है, चुप हो जाओ, मैं हूं ना।

मैं== ससुर जी, मैं विजय के लिए नहीं रो रही, आपको कैसे बताऊं?

ससुर जी== बताओ बहू, शायद मैं मदद कर सकूं।

मैं== ससुर जी, यह बात बताने वाली नहीं, अगर सास होती तो समझतीं।

ससुर जी== मुझे दोस्त समझो, बताओ क्या परेशानी है।

मैं== ससुर जी, मेरी उम्र 23 है, और आपका बेटा…

ससुर जी== क्या हुआ मेरे बेटे को?

मैं== बुरा न मानना, लेकिन वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते।

ससुर जी का चेहरा उतर गया, बोले बहू, इसमें मैं क्या कर सकता हूं, बताओ क्या करूं।

मैं== ससुर जी, मुझे आपके साथ…

ससुर जी गुस्से में== बहू, दिमाग खराब हो गया? मैं तेरे पिता समान हूं।

मैंने तेवर दिखाए== ठीक है, मुझे तलाक दिला दो, मैं घर छोड़ दूंगी।

ससुर जी== सोचो बहू, तेरे से कौन शादी करेगा?

मैं== कोई भी करेगा, मैं जवान हूं, आप अपने बेटे के लिए सोचो।

ससुर जी सोचे, फिर बोले बहू, मैं बूढ़ा हूं, 12 साल से सेक्स नहीं किया, कैसे मजा दूंगा?

मैं== मुझे सिर्फ आपके साथ सहवास चाहिए।

ससुर जी== ठीक है, तेरी मर्जी।

मैं== तो कपड़े उतारो।

मैंने उनके कपड़े उतारे, वो सिर्फ कच्छे में, शर्माते। लेकिन मैं वासना में डूबी थी, रिश्ते भूल गई। मैंने उनके होंठ चूमे, उनका हाथ अपनी चूची पर रखा, दबवाया। वो समझ गए, चूचियां दबाने लगे, होंठ चूसने लगे। मैंने जीभ निकाली, वो चूसे। उनकी नाइटी खोली, मेरी चूचियां तनीं, पैंटी से झांटें दिख रही थीं। मैंने उनका कच्छा में हाथ डाला, 8 इंच लंड पकड़ा, वो सिसके।

ससुर जी== आह्ह्ह बहू, तूने सोया सांप जगाया, तेरी चूचियां खा जाऊं।

मैं== खा जाओ ना।

मैं लंड रगड़ती, वो चूचियां चूसते, मसलते।

ससुर जी== 12 साल बाद बदन छुआ, मजा आ रहा।

मैं== लाज भूलो, मुझे बाजारू औरत समझो, मैं रंडी बनूंगी।

ससुर जी== हां मेरी रंडी, आज तेरी चूत फाड़ दूंगा।

वो उत्तेजित, मेरी पैंटी उतारी, चूत देखी, बालों वाली, गीली। वो जीभ से चाटने लगे, मैं सिसकियां लेती, आह्ह्ह ससुर जी, चूसो मेरी चूत। वो उंगली डाली, अंदर-बाहर, मैं झड़ गई। फिर उनका लंड मुंह में लिया, चूसा, गग्ग गग्ग, वो आह्ह्ह भरते। फिर मैंने कहा चोदो मुझे। वो लंड चूत पर रगड़े, धक्का मारा, अंदर गया, मैं चीखी, दर्द हुआ, लेकिन मजा आया। वो चोदते रहे, ठप ठप, मैं आह्ह्ह ऊह्ह्ह, और जोर से चोद। हम दोनों झड़ गए, लेकिन मैं और चाहती थी।

फिर मैं ऊपर आई, लंड पर बैठी, उछलती, चुदाई की। ससुर जी का लंड मेरी चूत में गहराई तक, मैं चुदक्कड़ बन गई। हमने कई पोजिशन ट्राई की, डॉगी में, वो पीछे से पेलते, मेरी गांड दबाते। मैं चिल्लाती, चोद ससुर जी, फाड़ दे मेरी चूत। 2 घंटे चुदाई चली, मैं 5 बार झड़ी, वो 2 बार। फिर हम थक कर लेटे, लेकिन मैं जानती थी यह शुरुआत है।

अब हर दिन जब विजय जाते, मैं ससुर जी से चुदवाती। वो बड़ा चुदक्कड़ निकला, रोज नई तरकीबें। मैं खुश थी, मेरी प्यास बुझ गई। बच्चे नहीं जानते, विजय नहीं जानते। यह मेरी जिंदगी का राज है।

यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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