हेलो दोस्तों, मेरा नाम अमित है। मैं 23 साल का हूं, लंबाई 5.7 फीट, गोरा रंग और काफी हैंडसम लगता हूं। यह मेरी सच्ची जिंदगी की घटना है जिसे मैंने सालों से अपने दिल में दबाकर रखा था, कभी किसी को बताने की हिम्मत नहीं हुई। अभी कुछ महीने पहले मेरी दिल्ली में नई नौकरी लगी थी, वहां से छुट्टी लेकर मैं गांव आया था। यह xxx बहन की चुदाई कहानी है, एक देसी xxx कहानी जो गन्ने के खेत में शुरू हुई और जिंदगी बदल गई। मेरी छोटी बहन नेहा के साथ जो हुआ, वह मैं कभी भूल नहीं सकता। नेहा 20 साल की है, उसका फिगर 36-28-34 का है, बिल्कुल फिल्मी हीरोइन जैसी सुंदर, गोरी चिट्टी, लंबे बाल और आंखें जो किसी को भी घायल कर दें। वह लखनऊ में कॉलेज में पढ़ती है, लेकिन छुट्टियों में घर आ गई थी। शहर जाकर वह और ज्यादा मॉडर्न हो गई थी, छोटे-छोटे कपड़े पहनती, जींस-टॉप में उसकी बॉडी देखकर किसी का भी मन डोल जाए। उसके बूब्स इतने बड़े और टाइट कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए, पतली कमर और भरी हुई गांड, बस देखते रहने को जी चाहे। मैं नौकरी की वजह से बाहर था, वहां लड़कियां तो दूर, कुछ देखने को नहीं मिलता, घर आकर नेहा को देखकर मेरे मन में गलत ख्याल आने लगे। मैं सोचता रहता कि बस किसी चुत की चुदाई कर लूं, चाहे नेहा की ही क्यों न हो, बस लंड को शांत करने की तलब थी।
एक दोपहर की बात है, मैं घर पर बैठा नेहा के बूब्स को चोरी-चोरी देख रहा था। वह सफेद टॉप और ब्लू जींस में थी, टॉप इतना टाइट कि निप्पल उभरे हुए दिख रहे थे। तभी मां ने कहा, ‘बेटा, जाकर पापा को खेत पर खाना दे आ।’ मैंने कहा, ‘ठीक है मां, पैक कर दो।’ नेहा बोली, ‘मां, मैं भी भैया के साथ जाऊंगी, खेत देखे हुए बहुत दिन हो गए।’ मां ने हामी भर दी, खाना पैक किया और हम निकल पड़े। रास्ता गांव का था, धूप तेज लेकिन हवा ठंडी चल रही थी। मैंने साइकिल ली, नेहा आगे बैठ गई, उसकी पीठ मेरे सीने से सट रही थी, उसकी खुशबू से मेरा लंड हल्का सा तनने लगा। हम बातें करते गए, नेहा हंस-हंसकर बताती कि कॉलेज में क्या-क्या होता है, दोस्तों की पार्टियां, डांस। मैं सोचता, यह कितनी बदल गई है, पहले शर्माती थी अब खुलकर बात करती है। खेत पहुंचे, पापा गन्ने के खेत में काम कर रहे थे, मजदूरों के साथ। हमने खाना दिया, पापा ने खाया और बोले, ‘मैं एक मजदूर को बुलाने गांव जा रहा हूं, थोड़ी देर लगेगी, तुम लोग घूमकर घर चले जाना।’ पापा चले गए, हम खेत में टहलने लगे। गन्ने ऊंचे-ऊंचे, हरे-भरे, चारों तरफ शांति, सिर्फ हवा की सरसराहट।
नेहा ने कहा, ‘भैया, कितना अच्छा लग रहा है यहां, शहर में तो इतनी हरियाली नहीं मिलती।’ मैंने हंसकर कहा, ‘हां, यहां की हवा ही अलग है।’ हम गन्ने के बीच घूमते रहे, मैंने एक गन्ना तोड़ा, छीलकर चूसने लगा, रस मीठा-मीठा। नेहा बोली, ‘मुझे भी दो ना।’ मैंने उसके लिए भी तोड़ा, वह मजे से चूसने लगी, उसके होंठों पर रस लग गया, देखकर मन किया चूम लूं। थोड़ी देर बाद नेहा बोली, ‘भैया, मुझे टॉयलेट लगी है।’ मैंने कहा, ‘यहां कोई बाथरूम नहीं, कहीं झाड़ी के पीछे कर ले।’ वह शर्मा गई लेकिन चली गई। मैं आगे गया लेकिन curiosity से पीछे मुड़कर देखा, गन्ने के झुंड के पीछे छुप गया। नेहा ने जींस नीचे की, पिंक पैंटी उतारी, उसकी गोरी गांड चमक रही थी, गुलाबी छेद साफ दिखा, मेरा लंड पैंट में तंबू बना रहा। वह बैठी, पेशाब किया, फिर खड़ी हुई, मैंने उसकी चुत की झलक देखी, हल्के बाल, गुलाबी-गुलाबी। मेरा लंड फटने को था, हाथ से दबाया लेकिन राहत नहीं मिली।
नेहा ने जींस पहनी, मुझे आवाज दी, ‘भैया!’ मैं पास गया, वह मुस्कुराई, उसकी नजर मेरे लोवर पर पड़ी जहां उभार साफ था। वह समझ गई, बोली, ‘भैया, मुझे एक अच्छा सा गन्ना दो ना।’ मैं सोचा, क्या मतलब? लेकिन कहा, ‘रुक, मैं लाता हूं।’ वह बोली, ‘जल्दी करो, रहा नहीं जा रहा।’ उसकी आवाज में शरारत थी। मैं खेत के अंदर गया, एक साफ जगह देखी, जहां घास थी, बैठने लायक। मन में नेहा की गांड घूम रही थी, मैंने पैंट नीचे की, 8 इंच का लंड बाहर निकाला, मुठ मारने लगा। आंखें बंद, नेहा की想像 में खोया था। अचानक हाथ महसूस हुआ, आंख खोली तो नेहा घुटनों पर बैठी लंड सहला रही थी। मैं चौंका, ‘नेहा, यह क्या कर रही है?’ वह बोली, ‘भैया, यह मेरी वजह से हुआ ना, तो मैं ही ठीक कर दूं।’ मैं मुस्कुराया, कुछ नहीं कहा। वह लंड मुंह में लेकर चूसने लगी, जैसे प्रोफेशनल, जीभ से चाटती, टोपा चूसती, आह… आह… की आवाज निकल रही थी। वह गन्ने की तरह चूस रही थी, लार बह रही थी, मेरा लंड चमक रहा था।
काफी देर चूसने के बाद मैंने उसे खड़ा किया, उसके टॉप के ऊपर से बूब्स दबाए, नरम-नरम, बड़े-बड़े। बोला, ‘रुक, मैं आता हूं।’ वह बोली, ‘कहां?’ मैंने कहा, ‘दो मिनट।’ भागकर पापा की चादर लाया जहां उन्होंने खाना खाया था, बिछा दी। नेहा के कपड़े उतारे, वह पूरी नंगी, बूब्स झूल रहे, निप्पल गुलाबी, चुत गीली। मैं भी नंगा हुआ, उसे लिटाया, बूब्स चूसे, एक-एक करके, काटा, वह सिसकारियां ले रही थी, ‘आह भैया… मजा आ रहा है।’ मैंने उंगली चुत में डाली, गीली थी, अंदर-बाहर की, वह कमर उचकाने लगी। चुत चाटी, जीभ से क्लिट रगड़ी, वह चिल्लाई, ‘भैया… आह… और करो।’ मैंने लंड पर थूक लगाया, चुत पर रखा, धक्का मारा, आधा अंदर, वह चीखी, ‘आह… दर्द हो रहा है।’ लेकिन मैं नहीं रुका, पूरा लंड डाला, चोदने लगा। नेहा की चुत टाइट लेकिन गीली, पता चला वह पहले चुद चुकी है, लेकिन मजा आ रहा था। मैं जोर-जोर से धक्के मारता, ठप-ठप की आवाज, वह बोली, ‘भैया, और तेज… मैं झड़ने वाली हूं।’ मैंने स्पीड बढ़ाई, वह झड़ गई, रस बहा। मैं भी झड़ा, लंड निकाला।
खड़े हुए तो पापा सामने खड़े, हम डर गए। लेकिन पापा मुस्कुराए, नेहा की गांड पर हाथ फेरा, बोले, ‘नेहा, तू तो और हॉट हो गई है।’ हम राहत की सांस ली। नेहा घुटनों पर बैठी, पापा का 9 इंच का लंड निकाला, सहलाया, बोली, ‘इतना बड़ा लंड घर में ही था, मैं बाहर चुदवाती रही।’ चूसने लगी, मैं देखता रहा, मेरा लंड फिर खड़ा। नेहा ने मेरा भी चूसा। पापा लेटे, नेहा ऊपर बैठी, लंड चुत में लिया, उछलने लगी। मैं पीछे गया, नेहा की गांड देखी, थूक लगाया, लंड डाला, वह चीखी लेकिन मजा लिया। हम दोनों मिलकर चोदते रहे, नेहा बीच में, आह… ऊह… की आवाजें। 30 मिनट बाद हम झड़े, नेहा ने लंड चूसकर साफ किए।
फिर हम घर आए, रात को मां सोई तो छत पर फिर चुदाई। नेहा को मैं और पापा मिलकर चोदते, अलग-अलग पोजिशन ट्राई कीं। एक बार नेहा डॉगी स्टाइल में, मैं पीछे से, पापा मुंह में। नेहा की चुत और गांड दोनों भरीं। छुट्टियां भर मजा लिया। नेहा कॉलेज गई, मैं जॉब पर, लेकिन फोन पर बातें, दीवाली पर फिर मिलेंगे।
अब मैं विस्तार से बताता हूं कि कैसे यह सब शुरू हुआ और कितना मजा आया। घर आने से पहले मैं दिल्ली में अकेला था, ऑफिस-होस्टल की जिंदगी, कोई गर्लफ्रेंड नहीं, बस पोर्न देखकर मुठ मारता। नेहा की फोटोज फेसबुक पर देखता, उसकी सेल्फी में बूब्स की क्लीवेज देखकर लंड खड़ा हो जाता। गांव आया तो नेहा बदली हुई, मिनी स्कर्ट पहनती, घर में ब्रा नहीं पहनती, निप्पल दिखते। मैं बाथरूम में उसके नाम की मुठ मारता। उस दिन खेत जाने से पहले नेहा ने मुझे हग किया, उसके बूब्स मेरे सीने से दबे, मैंने महसूस किया। साइकिल पर जाते वक्त ब्रेक लगाते समय उसके बूब्स छूते, वह हंसती। खेत में पापा के जाने के बाद हम गन्ने चूसते, नेहा का तरीका देखकर लगा वह शरारती है, होंठों से रस चाटती, मुझे देखकर। टॉयलेट वाली घटना ने आग लगा दी, उसकी नंगी गांड देखकर मैं पागल हो गया।
जब नेहा ने लंड चूसा, उसकी जीभ की गर्मी, लार की चिपचिपाहट, मैं स्वर्ग में था। मैंने उसके बाल पकड़े, मुंह में धक्के दिए, वह गैग करती लेकिन रुकी नहीं। बूब्स दबाते वक्त निप्पल काटे, वह सिसकारी, ‘भैया, धीरे… लेकिन अच्छा लग रहा है।’ चुत में उंगली करते वक्त दो उंगलियां डालीं, वह कमर हिलाती, रस बहता। चोदते समय हर धक्के में चुत की दीवारें लंड को कसतीं, ठप-ठप की आवाज गन्ने के बीच गूंजती। नेहा की आंखें बंद, मुंह खुला, आहें निकलतीं। झड़ने पर उसका शरीर कांपता, रस मेरे लंड पर। पापा के आने पर डर लेकिन फिर मजा, उनका लंड मोटा, नेहा चूसती जैसे आइसक्रीम। मैंने नेहा की गांड में डालते वक्त धीरे-धीरे किया, पहले टोपा, फिर पूरा, वह चिल्लाई लेकिन बोली, ‘और करो।’ सैंडविच पोजिशन में हम तीनों एक साथ, नेहा की चीखें, मजा दोगुना।
रात की चुदाई छत पर, चांदनी रात, मां नीचे सो रही। नेहा नाइट सूट में आई, हमने उतारा, पापा ने चुत चाटी, मैंने बूब्स चूसे। नेहा पापा के ऊपर, मैं पीछे, घंटों चला। अगले दिन सुबह नेहा के कमरे में, वह सो रही, मैंने चुत में उंगली डाली, जागी तो चुदाई। छुट्टियां भर रोज, कभी खेत, कभी घर, नेहा चुदक्कड़ बन गई, कहती, ‘भैया, तुम्हारा लंड सबसे अच्छा।’ पापा बोले, ‘बेटी, अब घर में ही मजा।’ नेहा चुदवाती रही, हम चोदते रहे।
एक दिन नेहा बोली, ‘भैया, कॉलेज में बॉयफ्रेंड है, लेकिन तुम्हारा लौड़ा जैसा नहीं।’ मैंने कहा, ‘अब सिर्फ हमसे चुदवाने आना।’ हमने ग्रुप सेक्स ट्राई किया, नेहा को डबल पेनिट्रेशन, चुत और गांड दोनों में लंड। वह चिल्लाती, ‘आह… फाड़ दो… चोदो मुझे।’ रस निकलता, हमारा वीर्य उसके मुंह में। मजा इतना कि भूल नहीं सकता।
अब दीवाली आने वाली है, नेहा आएगी, फिर वही धमाल। मैं सोचता हूं, यह रिश्ता बदल गया, लेकिन मजा है। नेहा कहती, ‘भैया, तुम्हारा लंड मेरा फेवरेट।’
यह सब सच्चा है, मैंने विस्तार से बताया ताकि आप महसूस करें।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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