हाय दोस्तों, मेरा नाम रिया है। मैं दिल्ली में रहती हूं। मैं बीकॉम सेकंड ईयर में पढ़ रही हूं। मेरी हाइट 5.4 है। मेरा रंग गोरा है और मेरे दोस्त मुझे बहुत सेक्सी कहते हैं। मेरा फिगर 36,28,34 है। मुझे ब्रा पहनने की आदत नहीं है क्योंकि मेरे बूब्स बहुत टाइट हैं। मेरा बदन गोल-मटोल है और मेरी गांड काफी भारी है। यह मेरी वह देसी हिंदी सेक्स कहानी है जो मेरी सच्ची जिंदगी की घटना है, जिसे मैं हमेशा दुनिया से छिपाकर रखना चाहती थी, लेकिन अब बता रही हूं। बात उस वक्त की है जब मैं यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी। वो दिन मेरी जिंदगी के सबसे यादगार दिन थे। मेरी दो सहेलियां मेरे साथ रहती थीं। उन दोनों के बॉयफ्रेंड थे जो उन्हें हफ्ते में दो या तीन बार चोदते थे। चुदाई के लिए मैंने अपनी मौसी के बेटे से बात की थी, लेकिन वो काफी दूर रहता था तो उसके साथ कुछ नहीं हो पाया। मुझे बॉयफ्रेंड बनाने का शौक नहीं था। मुझे सेक्स के बारे में उन्हीं दोनों से पता चला था। मैं उनकी बातें सुनकर अक्सर सोचती कि काश मेरा भी ऐसा कोई अनुभव हो। वो बतातीं कैसे उनके बॉयफ्रेंड उन्हें अलग-अलग पोजीशन में चोदते हैं, कैसे उनका लंड चूसती हैं, और कैसे मजा आता है। सुनकर मेरी चुत गीली हो जाती, लेकिन मैं कुछ कर नहीं पाती।
मेरी सहेलियां अक्सर ऐसी बातें करती रहतीं। मेरे मामा जी, जो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थे, उनकी उम्र 38 थी लेकिन लगते 30 के थे। वो लंबे-चौड़े थे, रंग साफ था। वो हमें आखिरी पीरियड में लेक्चर देते थे। क्लास को一个月 हो गया था। मेरी सहेलियां रोज सेक्सी ड्रेस पहनकर आतीं, सब लड़कों का लंड खड़ा हो जाता। लेकिन मैं इग्नोर कर देती। एक दिन मैंने नोटिस किया कि मामा जी मुझे घूरते रहते हैं। पहले कभी ध्यान नहीं दिया था। मैं सोचती कि शायद गलती से देख रहे होंगे, लेकिन उनकी नजरें मेरी टांगों पर, मेरे बूब्स पर रुकतीं। उस दिन मैंने शॉर्ट स्कर्ट और टाइट टॉप पहना था, वो मेरी चिकनी टांगों को देखते रहे, फिर ऊपर देखा मेरे बूब्स पर, फिर मुझे देखकर हल्की स्माइल दी। मैंने भी अनजाने में स्माइल दे दी। उनकी आंखों में कुछ अलग चमक थी, जैसे वो मुझे नंगी करके देख रहे हों।
उस दिन मामा जी घर आए, मां से बात कर रहे थे। अचानक मैं वहां आ गई। वो मां से बोले, ‘आपकी बेटी अब जवान हो गई है।’ मां ने कहा, ‘पढ़ाई पूरी होने दो, फिर देखेंगे।’ लेकिन मामा जी की नजरें मुझ पर थीं, हवस भरी। मुझे सब समझ आ गया। मेरे अपने मामा, जो मुझे गोद में खिलाते थे, अब मुझे चोदना चाहते थे। यह सोचकर मैं兴奋 हो गई। रात भर नींद नहीं आई, सोचती रही कैसे होगा, क्या होगा। मैं अपनी चुत को सहलाती रही, कल्पना करती कि मामा का लंड कैसा होगा, कितना बड़ा। सुबह उठी तो चुत गीली थी।
अगले दिन सहेली मिली, बताने लगी कैसे उसके बॉयफ्रेंड ने उसे चोदा। हंसकर मेरा मजाक उड़ाया कि तू अभी वर्जिन है। मैं सोचने लगी, मैं भी चुदवाने वाली हूं, लेकिन किससे? डर लगता बदनामी का। लेकिन दिल में ठान लिया कि मौका मिला तो करूंगी। ऐसे ही सोचते-सोचते साल निकल गया। मामा जी घूरते रहते, मजाक करते। कभी क्लास में मेरे पास आकर कंधे पर हाथ रखते, मैं कांप जाती। उनकी उंगलियां मेरी पीठ पर फिसलतीं, गर्मी महसूस होती।
अब पेपर आने वाले थे, अटेंडेंस चेक हुई। सब सब्जेक्ट में अच्छी थी, लेकिन इकोनॉमिक्स में कम। गुस्सा आया, सोचा प्रोफेसर से बात करूंगी। सहेली ने सलाह दी, ‘सेक्सी बनकर जा, वो तेरी अटेंडेंस बढ़ा देंगे।’ मैंने सोचा ठीक है।
अगले दिन मैंने शॉर्ट स्कर्ट और सफेद टी-शर्ट पहनी, ऊपर के दो बटन खुले, हाथ मोड़े, बाल खुले। लग रही थी जैसे कोई मॉडल।
यूनिवर्सिटी में सब लड़के मुड़-मुड़कर देखते, सीटियां मारते। सहेली बोली, ‘आज तो सबका लंड तेरी चुत में घुसना चाहता है।’ मैंने चुप कराया, हंस पड़ी। उसने प्रोफेसर का केबिन बताया।
अंदर गई, देखा प्रोफेसर तो मामा जी हैं। शॉक हो गई। वो भी मुझे देखकर तड़प उठे, ऊपर-नीचे देखा, हवस भरी स्माइल। मैं भी हंस पड़ी। बोले, ‘बैठो।’ मैं बैठी, नर्वस गई। बोली, ‘मामा जी, मेरी अटेंडेंस कम है।’
वो मुस्कुराए, ‘बढ़ा सकता हूं, लेकिन तुझे कुछ देना पड़ेगा।’ पास आए, कंधे पर हाथ रखा, सहलाने लगे। बोले, ‘कितने नंबर चाहिए?’ मैंने कहा, ‘फुल।’ उन्होंने गर्दन पीछे सहलाया, मैं साइड हुई।
फिर बातें करने लगे। सहेली की बातें याद आईं, मजाक उड़ाया था। जोश आ गया, लेकिन पहल नहीं की। मामा जी ने फिर छुआ, गर्दन सहलाया, हाथ पर हाथ रखा, मैंने कुछ नहीं कहा।
वो उठे, बाहर चपरासी को 100 रुपए दिए, केबिन लॉक करवाया, बोला प्रोफेसर नहीं हैं। पर्दा लगवाया। अब सिर्फ हम दोनों। मैं घबराई, बोली, ‘मामा जी, ये ठीक नहीं।’ बोले, ‘कुछ नहीं होता, तुझे देखकर दुनिया भूल जाता हूं।’ मैं हंसी, मूड बना लिया।
बोली, ‘मम्मी को पता नहीं लगना चाहिए।’ बोले, ‘चिंता मत कर, पेपर में फुल नंबर दूंगा।’ पास आए, टेबल पर लिटाया, किस किया, हाथ स्कर्ट में डाला, चुत पर फेरा। स्कर्ट खोली, बूब्स देखकर पागल हुए, मुंह में पानी आया।
पागलों जैसे बूब्स चाटे, दबाए, चूसे। मजा आ रहा था। केबिन में ही किया। स्कर्ट हुक खोला, चुत पर किस, पैंटी उतारी, टांगें फैलाईं। बाल रहित चुत देखी, उनका लंड तैयार। कपड़े उतारे।
चुत को जीभ से छुआ, करंट लगा। जीभ से चाटा, मजा आया। छोटी उंगली डाली, चीख निकली। उंगली अंदर-बाहर, बूब्स दबाए। चुत ने पानी छोड़ा, उन्होंने पिया।
कुर्सी पर बैठे, मैं घुटनों पर, लंड सहलाया। चूसा, बड़ा था, मुंह में लिया। चूस-चूसकर टाइट किया। वो सिसकारियां भरते।
मुझे जमीन पर लिटाया, लंड चुत पर रगड़ा, मजा आया। धक्का मारा, आह निकली, आधा लंड अंदर। बड़ा मोटा था। दूसरा धक्का, पूरा अंदर, आंसू निकले, दर्द हुआ। पहली चुदाई थी।
लंड आगे-पीछे, चोदना शुरू। दर्द के साथ मजा। लंड पेट में लगता। जोर से चोदा, मैं चिल्लाई, ‘फाड़ दो, उफ्फ।’ वो आह भरते।
पोज चेंज, घुटना टेबल पर, चुत हवा में, पीछे से चोदा। कमर पकड़ी, जोर के झटके, मैं हिल गई। 15 मिनट चला।
बोले, ‘वीर्य निकलने वाला है।’ मैंने कहा, ‘अंदर मत, बाहर निकालो।’ उन्होंने लंड निकाला, मेरे बूब्स पर झाड़ा। मैं हांफ रही थी, मजा आया। फिर साफ किया, कपड़े पहने। बोले, ‘अब जब मन करे आ जाना।’ मैं मुस्कुराई। अब हमारा रिश्ता बदल गया। हर हफ्ते केबिन में चुदाई होती। कभी घर पर, कभी होटल में। मैं उनकी चुदक्कड़ बन गई। चुदवाने का मजा अलग है। मामा का लंड हमेशा तैयार रहता। कभी लौड़ा चूसती, कभी चुत चटवाती। चोदते समय वो जोर से पेलते, मैं चिल्लाती। अब मैं अनुभवी हो गई।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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