हैलो दोस्तों, यह मेरी देसी हिंदी सेक्स कहानी है, एक तरह की xxx mom सेक्स कहानी जो मेरी जिंदगी की वो सच्ची घटना है जिसे मैंने सालों तक अपने दिल में दबाकर रखा था, कभी किसी से शेयर नहीं करना चाहता था। मेरा नाम राहुल है, और ये बात तब की है जब मैं 16 साल का था। मेरी मां नहीं थीं, और पापा ज्यादातर काम के सिलसिले में बाहर रहते थे। इसलिए मैं अपने मामा-मामी के पास रहता था। हमारा घर मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में था, जहां सब कुछ शांत और सादा था। मामा व्यापार के लिए अक्सर बाहर जाते थे, और घर में मैं, मामी और उनकी बेटी प्रिया रहते थे। मामी का नाम पूजा था, वो 35 साल की थीं, गोरी-चिट्टी, भरा हुआ बदन, लंबे बाल और हमेशा साड़ी में रहतीं। घर छोटा था, सिर्फ एक कमरा, जहां हम सब सोते थे। जब मामा घर पर होते तो मैं और प्रिया कमरे में सोते, और मामा-मामी बाहर वरांडे में। मैंने कई बार नोटिस किया कि उनका एक बिस्तर हमेशा साफ-सुथरा रहता, जबकि दूसरा बिल्कुल बिखरा हुआ। उस वक्त मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा पता नहीं था, बस स्कूल के दोस्तों से सुनी-सुनाई बातें।
एक रात की बात है, मैं गहरी नींद में था। सुबह के करीब 4-5 बजे अचानक मुझे लगा कि मेरा पजामा गीला हो गया है। मैंने सोचा शायद पेशाब निकल गया, और शर्म से मैं रोने लगा। मैंने मामी को जगाया और रोते हुए कहा, ‘मामी, मेरा मूत निकल गया लगता है।’ पहले तो वो गुस्सा हुईं, लेकिन जब उन्होंने चेक किया तो देखा बिस्तर सूखा है, सिर्फ पजामा गीला है, और वो भी पेशाब नहीं, बल्कि कोई गाढ़ा सफेद पानी। वो मुस्कुराने लगीं। मैं और जोर से रोया तो उन्होंने कहा, ‘अरे बेटा, कुछ नहीं हुआ। इस उम्र में ऐसा होता है।’ मैंने पूछा, ‘क्या होता है?’ तो वो बोलीं, ‘तुमने कोई गंदा सपना देखा होगा, इसलिए। जाओ, साफ कर लो और पजामा बदल लो।’ लेकिन मेरा लंड अभी भी तना हुआ था, और उससे कुछ निकल रहा था। मैं डर गया था, सोचा कोई बीमारी हो गई।
मैंने मामी को बताया तो वो बोलीं, ‘कोई बात नहीं, निकलने दो। सुबह मैं धो दूंगी।’ मामी की एक आदत थी कि सुबह उठते ही उन्हें पेशाब लग जाता था। हमारे घर में टॉयलेट नहीं था, बाहर जाना पड़ता था। उस दिन भी वैसा ही हुआ, लेकिन अंधेरा था तो वो डर रही थीं। उन्होंने मुझे कहा, ‘राहुल, तुम साथ चलो ना।’ हमने दरवाजा बाहर से लॉक किया क्योंकि प्रिया सो रही थी, टॉर्च ली और बाहर निकल गए। मामी ज्यादा दूर नहीं गईं, घर के पास ही झाड़ियों के पास। बोलीं, ‘मैं यहीं बैठ जाती हूं, तुम भी कर लो।’ वो साड़ी ऊपर उठाकर पैंटी नीचे करने लगीं। मुझे अजीब सा लगा, लेकिन अच्छा भी। फिर वो बैठ गईं, मैं भी पजामा खोलकर पास ही बैठ गया। दिल धड़क रहा था, पहली बार ऐसा कुछ देख रहा था।
मामी को डर लग रहा था, हवा से झाड़ियां हिलतीं तो कहतीं, ‘देखो, कोई सांप तो नहीं?’ मैं टॉर्च से चारों तरफ देखता। एक बार टॉर्च की रोशनी मामी पर पड़ गई, उनकी गोरी जांघें दिखीं। मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा। मामी कुछ नहीं बोलीं। मैंने फिर टॉर्च फेरा, और इस बार उनकी झांटों वाली चूत दिखी। मेरा लंड एकदम तन गया, पजामा में तंबू बन गया। कामुकता की वो पहली झलक थी, शरीर में आग सी लग गई।
बाद में मैंने टॉर्च उन्हें दी और हाथ धोने लगा। मामी ने टॉर्च मेरी तरफ की, मेरा खड़ा लंड देखा। वो देखती रहीं, टॉर्च नहीं हटाई। मैं शर्मा गया, लेकिन अच्छा लगा। फिर हम घर आए। मामी बोलीं, ‘अब तो तुम बार-बार पजामा गंदा करोगे।’ मैंने पूछा, ‘क्यों?’ तो बोलीं, ‘तुम जवान हो रहे हो ना।’ मैंने कहा, ‘कैसे?’ वो बोलीं, ‘शरीर पर बाल आ रहे हैं, बगलों में, पेट के नीचे।’ मैंने कहा, ‘तो मैं क्या करूं?’ वो बोलीं, ‘किसी लड़की से दोस्ती कर लो।’ मैंने पूछा, ‘उससे क्या होगा?’ बोलीं, ‘पहले कर लो, फिर समझ जाओगे।’ मैंने मजाक में कहा, ‘मेरी तो कोई दोस्त नहीं, आप ही बन जाओ।’ वो मुस्कुरा दीं और नहाने चली गईं। उस मुस्कान में कुछ अलग था, जो मुझे सोचने पर मजबूर कर गया।
कुछ दिन बाद फिर एक रात मेरे लंड से कुछ निकला। इस बार सपने में मामी ही थीं। मैं चुपचाप उठा, पजामा बदलने लगा, लेकिन मामी जाग गईं। पूछा, ‘क्या हुआ?’ मैंने कहा, ‘कुछ नहीं,’ लेकिन वो नहीं मानीं। पजामा देखा, सफेद गाढ़ा वीर्य लगा था। उन्होंने सूंघा, मुस्कुराईं और बोलीं, ‘शैतान, फिर गीला कर दिया।’ मैंने कहा, ‘नींद में हो गया।’ वो बोलीं, ‘कोई बात नहीं, लेकिन अब मुझे फिर बाहर जाना पड़ेगा।’ मुझे फिर उनके साथ जाना पड़ा। इस बार मैं उनके और करीब बैठा।
मामी ने पूछा, ‘सच बताओ, जब पजामा गीला हुआ तो क्या सपना देख रहे थे?’ मैंने कहा, ‘सपने में आप ही थीं।’ वो बोलीं, ‘चल शैतान, मामी पर लाइन मारता है।’ बीच-बीच में टॉर्च से उनकी चूत देख लेता, और वो मेरा खड़ा लंड देख रही थीं। पूछा, ‘सपने में मैं क्या कर रही थी?’ मैंने कहा, ‘कपड़े बदल रही थीं, मैं छुपकर देख रहा था।’ बोलीं, ‘क्या देखा?’ मैंने कहा, ‘आपकी पूरी बॉडी।’ बोलीं, ‘नाम लेकर बताओ।’ मैं शर्मा गया, लेकिन बोला, ‘आपके स्तन, योनि और कुल्हे।’
वो हंसकर बोलीं, ‘मुझे किताबी नाम नहीं, रोजमर्रा के नाम बताओ। और कौन सा पार्ट सबसे अच्छा लगा?’ मैंने कहा, ‘आपकी चुचियां, चूत और गांड। गांड सबसे अच्छी लगती है।’ वो शर्मा गईं, चुप हो गईं। मैंने सोचा, शायद गुस्सा हो गईं, लेकिन उनकी आंखों में कुछ और था, शायद उत्सुकता।
फिर बोलीं, ‘तुम ऐसे कब तक रात को परेशान होते रहोगे?’ मैंने कहा, ‘क्या करूं?’ वो बोलीं, ‘दिन में हाथ से निकाल दिया करो।’ मैंने पूछा, ‘कैसे?’ बोलीं, ‘अपने इस तंबू जैसे लंड को हाथ में लेकर मुठ मार लिया करो, रात को नहीं निकलेगा।’ मैंने कहा, ‘मुझे नहीं आता, आप सिखा दो।’ वो बोलीं, ‘देखूंगी, जब प्रिया घर पर न हो।’ मैंने कहा, ‘ठीक है।’ आज मामी की चूत पर बाल नहीं थे, चमक रही थी। हम घर आए, लेकिन मेरा मन नहीं लगा, पूरे दिन उस बात के बारे में सोचता रहा।
दोपहर को प्रिया पड़ोस में गई तो मैंने मामी से कहा, ‘अब सिखा दो।’ वो बोलीं, ‘अभी नहा लूं, बाद में।’ मैंने कहा, ‘मुझे भी नहाना है, क्या साथ नहा लूं?’ वो बोलीं, ‘ठीक है, वही सिखा दूंगी, पजामा गंदा नहीं होगा।’ मैं खुश हो गया, दिल तेज धड़कने लगा।
हम बाथरूम में गए। वो बोलीं, ‘चलो, कपड़े निकाल दो, पहले तुम्हें नहलाती हूं।’ मैंने फटाफट कपड़े उतारे। वो मेरे लंड को देखकर बोलीं, ‘तुम तो पूरे जवान हो गए हो।’ फिर हाथ रखा, मुझे电流 सा लगा। वो सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में थीं, चूचियां दिख रही थीं। मेरा लंड तन गया।
वो बोलीं, ‘क्या मन हो रहा है?’ मैंने कहा, ‘आपकी चूत देखने का।’ वो बोलीं, ‘देखकर क्या करोगे?’ मैंने कहा, ‘अच्छी लगती है।’ उन्होंने पेटीकोट ऊपर उठाया। मैंने कहा, ‘प्लीज निकाल दो।’ उन्होंने पेटीकोट और ब्रा उतार दी। पहली बार किसी औरत को नंगा देखा, उनकी चिकनी चूत चमक रही थी। वो मेरा लंड सहला रही थीं।
मैंने हाथ उनकी चूत पर रखा, गर्म और गीली थी। मामी कुछ नहीं बोलीं, लेकिन लंड तेज हिलाने लगीं। मैंने एक उंगली चूत में डाली, वो आह करने लगीं। मैं उनकी चूची दबा रहा था। शरीर में सिहरन दौड़ रही थी, पहली बार का अनुभव था, डर और मजा दोनों।
करीब 5 मिनट बाद मुझे लगा शरीर अकड़ रहा है, लंड फटने वाला है। मैंने कहा, ‘मामी, क्या हो रहा है, मैं पिघलने वाला हूं।’ वो और तेज हाथ चलाने लगीं। मैंने उनकी चूत में उंगली जोर से की।
अचानक लंड से सफेद वीर्य निकला, मजा आया। मैं मामी की चूत में उंगली करता रहा। वीर्य उनके हाथ और जांघों पर गिरा, लेकिन वो नहीं रुकीं। दो मिनट बाद लंड शांत हुआ। मैं हांफ रहा था, पैर कांप रहे थे।
फिर मामी ने मुझे नहलाया, बोलीं, ‘किसी को बताना नहीं।’ मैं बाहर आया, लेकिन मन में तूफान था। लगा जिंदगी बदल गई। अगले दिनों मैं अकेले मुठ मारने लगा, लेकिन मामी का स्पर्श याद आता।
एक दिन मामी ने मुझे अकेले में बुलाया, बोलीं, ‘राहुल, वो दिन का मजा आया?’ मैंने हां कहा। वो बोलीं, ‘फिर से करना है?’ मैं उत्साहित हो गया। इस बार हमने ज्यादा समय लिया, एक-दूसरे को छुआ, बातें कीं। मामी ने बताया कैसे औरतों को मजा आता है।
धीरे-धीरे हमारा रिश्ता बदल गया। मामा जब बाहर जाते, हम मौके ढूंढते। लेकिन कभी आगे नहीं बढ़े, सिर्फ हाथ से। मैंने सीखा कि सेक्स क्या है, मामी ने सिखाया।
एक रात मामा नहीं थे, प्रिया सो गई। मामी मेरे पास आईं, बोलीं, ‘आज कुछ नया ट्राई करें?’ हमने एक-दूसरे को पूरी तरह एक्सप्लोर किया, लेकिन सुरक्षित। मजा दोगुना था।
ये सिलसिला चला, मैं जवान हुआ, लेकिन वो पहला अनुभव कभी नहीं भूला। मामी ने मुझे न सिर्फ मुठ मारी, बल्कि जीवन की वो सीख दी जो किताबों में नहीं मिलती।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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