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ट्रेन में अनजान औरत के साथ रात भर की चुदाई

February 21st, 2026 - 5:26 PM
in अज़नबी से सेक्स
Reading Time: 1 min read
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यह मेरी वो सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा छुपाकर रखना चाहता था, लेकिन आज दिल कर रहा है कि सबको बता दूं। हेलो दोस्तों, यह एक xxx हॉट देसी स्टोरी है जो मेरे साथ ट्रेन में घटी। मेरा नाम राहुल है। मैं 22 साल का हूं और कॉलेज के लिए अपनी चाची के घर से वापस लौट रहा था। अचानक प्लान बना इसलिए रिजर्वेशन नहीं मिला। मैंने सोचा जनरल में ही चला जाता हूं, अकेला हूं सामान भी कम है। एक्सप्रेस की जनरल बोगी में चढ़ते ही ट्रेन चल पड़ी। भीड़-भाड़ इतनी कि धक्का-मुक्की करके किसी तरह थोड़ी जगह मिली। मैं जहां बैठा, मेरे दाएं तरफ एक 23-24 साल की लड़की बैठी थी जो शादीशुदा लग रही थी, इसलिए मैंने उसे औरत ही कहा।

उसके कपड़ों से लग रहा था कि वो गरीब परिवार से है। साड़ी पुरानी सी, लेकिन चेहरा बहुत गोरा और आकर्षक। वो खिड़की के पास थी, मैं उसके ठीक बगल में और मेरे बाद एक 50 साल का बूढ़ा आदमी। ठंड बहुत थी इसलिए मैंने उससे कहा कि खिड़की बंद कर लीजिए। उसने बंद कर दी। शाम के करीब 7:30 बज रहे थे। ज्यादातर यात्री सोने लगे थे। वो भी खिड़की पर सिर टिका कर सो गई। मुझे भी नींद आने लगी। ट्रेन के हिलने से उसकी जांघें मेरी जांघों से रगड़ खा रही थीं, बहुत अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर में मैंने झपकी लेते हुए अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया। अचानक होश आया तो सिर हटा लिया। उसे लगा शायद अनजाने में हुआ है इसलिए कुछ नहीं बोली।

फिर कुछ देर बाद फिर वही हुआ। मैंने सिर हटाया। इस तरह 3-4 बार होने पर वो बोली, कोई बात नहीं आप आराम से सिर रख लीजिए, क्योंकि जब मेरा सिर खिड़की से टकराता है तो नींद खुल जाती है। मैंने उसके कंधे पर सिर रख लिया और सो गया। नींद में ही मेरा बायां हाथ उसकी जांघ पर था और ट्रेन के झटकों से उसकी नरम जांघें रगड़ रही थीं। मैंने दायां हाथ उसके गले में डाल दिया। उसने मेरी हथेली पर अपना सिर रख लिया, शायद खिड़की से चोट लग रही थी। थोड़ी देर बाद नींद आधी खुली तो मैं चौंक गया। लेकिन मैं वैसे ही पड़ा रहा क्योंकि कुछ करने से वो जाग सकती थी। मुझे लगा उसे भी मजा आ रहा है।

फिर मैं सीधा होकर बैठ गया और उसका सिर अपने कंधे पर रख लिया। उसने भी आराम से सिर मेरे कंधे पर रख दिया। इसी दौरान उसका गाल मेरे गाल से छू गया, मुझे झटका लगा। मेरा बायां हाथ उसकी जांघों को सहला रहा था। मेरा लंड पैंट में कड़क हो गया और चुदाई का ख्याल मन में आने लगा। मैंने शाल ओढ़ने के बहाने अपना हाथ उसकी चुचियों पर रख दिया और शांत हो गया। जब वो कुछ नहीं बोली तो साहस बढ़ा और मैंने हल्के से चुचियां दबानी शुरू कीं। वो मेरी तरफ और सरक आई। मैं समझ गया कि वो भी तैयार है।

थोड़ी देर में उसने अपना हाथ मेरे पैंट पर रख दिया। वो पैंट के ऊपर से मेरे लंड को सहला रही थी। मैंने देखा सभी सो रहे हैं। मैंने उसे अच्छे से शाल में छुपा लिया और उसकी साड़ी ऊपर कर दी। पैंटी पर हाथ लगाया तो वो पूरी गीली थी। वो मेरे पैंट की जिप खोल रही थी। तभी एक स्टेशन आया। हम वैसे ही पड़े रहे। स्टेशन पर बहुत से लोग उतर गए। रात के 11:30 बज रहे थे। ट्रेन चल पड़ी। अब सामने वाली सीट पर सिर्फ 4 यात्री थे और हमारी सीट पर हम और वो बूढ़ा। ट्रेन रुकने से सभी जाग गए थे। मैंने सामने वालों से पूछा आप लोग कहां उतरेंगे। उन्होंने कहा अगले स्टॉप पर। बूढ़े ने कहा मुझे भी जगा देना। मैंने पूछा अगला स्टॉप कब। बोले 40 मिनट बाद।

मैंने शाल से कंबल निकालकर उन दोनों को ढक दिया। 10 मिनट में सब सो गए। मैंने उससे नाम पूछा। बोली सुनीता। उसका पति मुंबई में रिक्शा चलाता है। शादी को 8 महीने हुए हैं। सास से नहीं बनती थी इसलिए मायके जा रही हूं जो नागपुर से 5-6 स्टॉप पहले है। शायद 3:30 बजे पहुंचेगी। मैंने पूछा सुनीता तुम्हें बुरा तो नहीं लग रहा। वो बोली अच्छा लग रहा है साहब। मेरे पति ने तो कभी तन का सुख नहीं दिया। दारू पीकर सो जाता है। वो रोने लगी। मैंने उसे सीने से लगा लिया और बोला रो मत। फिर मैंने उसकी चुचियां दबानी शुरू कीं।

सुनीता बोली, आ..आ.. धीरे साहब। मैंने कहा ब्लाउज खोल दूं। बोली खोल दीजिए। मैंने ब्लाउज खोला। अंदर टाइट ब्रा थी जो मुश्किल से खुल रही थी। उसने पीछे हाथ करके खोल दी। मैंने चुचियां सहलानी शुरू कीं। वो मेरे लंड को प्यार से सहला रही थी। निप्पल पकड़ता तो उसके मुंह से उई..आ..ईईई निकलती। सुनीता बोली साहब मैं आपका लंड मुंह में लूं। मैंने कहा हां ले लो और चूसो। वो चूसने लगी। मैंने हाथ पीछे लेकर पैंटी उतारी और चूत पर रखा। चूत गर्म थी, घने बाल थे, पूरी गीली। हाथ गीला हो गया। मैंने सूंघा तो क्या खुशबू थी। फिर मैंने चूत का रस चाटा, मजा आ गया।

तभी सामने वाले ने बूढ़े से कहा चाचा बैतूल आ गया। हम वैसे ही पड़े रहे। थोड़ी देर में ट्रेन चली तो कंपार्टमेंट लगभग खाली हो गया। मैंने कहा सुनीता कभी चूत चुसवाई है। बोली नहीं साहब। मैंने कहा आज मैं चूसता हूं। बोली दर्द तो नहीं होगा। मैंने कहा बहुत मजा आएगा। तुम्हें मेरा लंड चूसने में मजा आ रहा है ना। बोली बहुत मजा आ रहा है साहब। आपका लंड तो बहुत बड़ा है 9 इंच का। मेरे पति का बहुत छोटा है। मैं समझ गया वो सेक्स की भूखी है।

मैंने 69 पोजिशन बनाया। मैंने उसके बाल हटाकर चूत के होंठ अलग किए और जीभ अंदर डाल दी। वो बोली साहब क्या कर रहे हो। मैंने उसका सिर पकड़कर लंड पर दबा दिया। वो जोर-जोर से चूसने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। थोड़ी देर में उसने पानी छोड़ दिया। मैंने सारा रस चाट लिया। फिर मेरे लंड ने पानी छोड़ा तो वो मुंह हटाने लगी। मैंने सिर दबाकर कहा क्या कर रही हो, इस अमृत के लिए लड़कियां मरती हैं। वो पूरा वीर्य पी गई और बोली साहब बहुत अच्छा लगा।

फिर हम बाथरूम गए। वहीं पेशाब किया और एक-दूसरे को गर्म करने लगे। मैं उसके टांगों के नीचे बैठकर चूत चाटने लगा। वो बोली साहब अब लंड की चूत को चखाओ। मैंने एक पैर ऊपर करके लंड चूत पर लगाया और धक्का मारा। वो चीखी उउउइईई साहब मर जाऊंगी निकालो। मैंने होंठ चूमे और जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। उसके मुंह से हु.. हु.. निकला। थोड़ी देर में रास्ता बन गया। लंड आसानी से आ-जा रहा था। उसे मजा आने लगा। बोली साहब पैर दर्द कर रहा है। मैंने उसे कमोड पर बिठाया और चोदना शुरू किया। वो बोली और जोर से.. मेरी चूत फाड़ दो साहब.. बहुत मजा आ रहा है.. आह्ह ऊह्ह चोदो साहब मेरी चूत की प्यास बुझा दो।

मैं जोश में झटके मारने लगा। वो गांड उचकाने लगी। 10 मिनट बाद बोली और तेज। मैंने स्पीड बढ़ाई। हम दोनों एक साथ झड़े। उसने मुझे कसकर सीने से लगाया। तब तक लंड छोटा होकर निकल गया। फिर उसने पानी से लंड धोया, चूत साफ की। हम सीट पर कपड़े पहनकर बैठ गए। सर्दी में भी पसीने से तर। थोड़ी देर में मुझे नींद आई और मैं उसके गोद में सिर रखकर सो गया। नींद चाय वाले ने तोड़ी। मैंने देखा वो नहीं थी। चाय वाले से पूछा गाड़ी कहां है। बोला नागपुर से एक स्टेशन पहले। मैं रात की बात याद करके मुस्कुराया।

यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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